सामाजिक न्याय पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा में दलित उत्पीड़न के जघन्य कांड हुए हैं जिस कारण हरियाणा का समाज राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहा है।
सामाजिक न्याय पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा में दलित उत्पीड़न के जघन्य कांड हुए हैं जिस कारण हरियाणा का समाज राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहा है।
सिनेमा माध्यम भारत में अपने सौ साल पूरे कर चुका है। सिनेमा ने भारतीय समाज को गहरे से प्रभावित किया है। बदलते हुए समाज को भी सिनेमा में देखा जा
लोक कथा एक चिड़िया थी अर एक था कौआ। वै दोनों प्यार प्रेम तै रह्या करै थे। एक दिन कौआ चिड़िया तै कहण लाग्या अक् चिड़िया हम दोनों दाणे-दाणे
आलेख अर्थशास्त्री, राजनेता, मंत्री लेखक, संविधान निर्माता आदि सभी रूपों और परिस्थितियों में डा.आम्बेडकर ने किसान हित की अनदेखी नहीं की। वे समय-समय पर सभी रूपों में किसानों के कल्याण
लघुकथा रमलू किसान ने इस बार उगी धान की फसल मंडी में 12 रूपये किलो बेची थी। पैसे की तुरन्त जरूरत के कारण उसने अपनी जरूरत को
देस हरियाणा की नई विडियो देखने के लिए चैनल सब्सक्राईब करें… देस हरियाणा पत्रिका द्वारा आयोजित हरियाणा सृजन उत्सव के उदघाटन अवसर पर 23 फरवरी 2018 को देस हरियाणा सृजनशाला
सामाजिक न्याय अपने निर्माण के पचास वर्षों के दौरान हरियाणा राज्य का तीव्र आर्थिक विकास हुआ है। विकास के माप हेतु निर्मित सूचकांक के विभिन्न सूचकों को इस राज्य के
महिला जब हम छोटे थे तो हमारी दादी-मांओं, चाची-ताइयों से सुना करते थे कि जब आजादी का आंदोलन जारी था तो वो ये गीत बड़े ही चाव से गाया करती
सामाजिक न्याय हरियाणा इस वर्ष अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा है। ये 50 साल हर क्षेत्र में हुए बदलावों के गवाह हैं। हरित क्रांति के प्रभावों से कृषि पैदावार में
सेहत भारत में 1980-90 के दशकों तक ‘हस्पताल’ सुविधा ज्यादातर सरकारी या पब्लिक क्षेत्र में थी। आर्थिक उदारीकरण के बाद ढांचागत परिवर्तन से सरकारों ने निजी संस्थाओं के लिए सस्ती
शख्सियत समाज सेवक व दानवीर चौधरी छाज्जूराम हरियाणा में ही नहीं, बल्कि भारतवर्ष में भी अपनी एक विशेष पहचान रखते है। इनका जन्म 27 नवंबर 1861 को आधुनिक जिला भिवानी,
मेरे पांव लडख़ड़ाते हैं लेकिन मेरे हौसलों को कभी लडख़ड़ाने नहीं दिया क्योंकि मुझे बहुत आगे तक जाना है इन्हीं पांवों से चलकर और बस आगे बढ़ते जाना है।’
रपट गुड़गांव के हाई-वे पर बने अपार्टमेण्ट-शापिंग मालों, आईटी पार्क, साफ्टवेयर व आटो सेक्टर की कम्पनियों की चमक-दमक के कारण गुडगांव की चर्चा पूरे देश में है। अकेले हरियाणा कुल
इतिहास हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में यमुना नदी के किनारे एक शहर की स्थापना दसवें पातशाह साहिब श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी द्वारा हुई थी। इस शहर को पांवटा
लोक कथा एक आदमी कैदो मैंस थी। उसका छोरा उननै चराण जाया करदा। दोनू मैंस ब्यागी। एक नै दिया काटड़ा अर दूसरी नै दी काटड़ी। वो काटड़ा घणा ऊत था।
कविता न जाने कब से रूढिय़ों में कै़द समाज काला पानी की जेल लगने लगा है। हमारा विश्वास है कि बंद कोठरियों के ताले तड़ातड़ टूटने लगेंगे। घायल हथेलियों से
अफ्रीकी कहानी उनका कहना है कि मेरा जन्म घाना के मध्यभाग में स्थित एक बड़े गांव हसोडजी में हुआ। वे ऐसा भी कहते हैं कि जब सारा अफ्रीका सूखा-ग्रस्त था,
व्यक्तित्व मैं तब साढ़े तीन बरस का था। सिडनी, मेरा भाई, मुझसे चार बरस बड़ा था। मां थिएटर कलाकार थीं, हम दोनों भाइयों को बहुत प्यार से लिटाकर थिएटर चली
कहानी उठते ही मोबाइल पकड़ने लगा हूं। पकड़ने क्या अपने आप ही हाथ मोबाइल पर चला जाता है ठीक उसी तरह से जैसे सिग्रेट के प्यक्कड़ का हाथ सिग्रेट की
आलेख सदानंद साही समय आ गया है कि हम भाषा के सवाल को गंभीरता से लें। भाषा मनुष्य होने की शर्त है। इसे सिर्फ अभिव्यक्ति, संपन्न और दरिद्र जैसे पैमाने
साखी – कटू बचन कबीर के, सुनत आग लग जाय। शीलवंत1 तो मगन भया, अज्ञानी जल जाय।।टेक अवधू दोनों दीन कसाई। चरण – हिन्दू बकरा मिण्डा मारे, मुसलमान मुर्गाई। कांच
साखी – अलख1 इलाही2 एक है, नाम धराया दोय। कहे कबीर दो नाम सुनी, भरम3 पड़ो मति कोय।।टेक कहां से आया कहां जाओगे, खबर करो अपने तन की। सतगुरु मिले
साखी -गुरु लोभी शिष्य लालची, दोनों खैले दाव। दोनों बपुरे बूडही1, चढ़ी पत्थर की नाव।।टेक भक्ति करो ब्राह्मांड में साधु- ऐसी भक्ति करो मन मेरे, आठ पहर आनंद में हो।
साखी – हंसा तू तो सबल था, हलुकी1 अपनी चाल। रंग करंगे रंगिया, किया और लगवार2।टेक जग मैं भूला रे भाई, मेरे सतगुरु जुगत3 लखाई4। चरण – किरिया-करम-अचार मैं छाडा,