◊ प्रो. सूरजभान पिछले एक दौर में अपनी विरासत के बारे में हमारी चेतना बहुत कमजोर पड़ी है। हम काफी हद तक अपने इतिहास के बेहतर पहलुओं को भूलते
◊ प्रो. सूरजभान पिछले एक दौर में अपनी विरासत के बारे में हमारी चेतना बहुत कमजोर पड़ी है। हम काफी हद तक अपने इतिहास के बेहतर पहलुओं को भूलते
प्रो सूरजभान भारत में इस वर्ष 1857 के राष्ट्रीय विद्रोह की 150वीं सालगिरह मनाई जा रही है। इस विद्रोह को देसी और विदेशी इतिहासकारों ने अपनी – अपनी दृष्टियों से
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इतिहास ◊ प्रो सूरजभान सतनामी सम्प्रदाय में जाट, चमार, खाती आदि छोटी जातियों के लोग शामिल थे। परन्तु उन्होंने अपने जातिगत भेद मिटा दिए थे। वे सादा भोजन करते और
शख्सियत समाज सेवक व दानवीर चौधरी छाज्जूराम हरियाणा में ही नहीं, बल्कि भारतवर्ष में भी अपनी एक विशेष पहचान रखते है। इनका जन्म 27 नवंबर 1861 को आधुनिक जिला भिवानी,
इतिहास हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में यमुना नदी के किनारे एक शहर की स्थापना दसवें पातशाह साहिब श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी द्वारा हुई थी। इस शहर को पांवटा
इतिहास के पन्नों से भारतीय स्वतंत्रता-संग्राम में 1857 व गदर-लहर दो महत्त्वपूर्ण सशस्त्र विद्रोह रहे हैं। दिलचस्प बात ये है कि दोंनों में हरियाणा क्षेत्र की उल्लेखनीय भूमिका रही है।
संस्मरण सोमैया इस संसार में बिल्कुल अकेला था। उसे न तो अपनी मां की याद थी और न बाप की। गांव के बड़े-बूढ़ों से जो कुछ सुनता था, उसे ही
इतिहास के पन्नों से… -जार्ज थॉमस प्रकरण के बहाने- हरियाणा के इतिहास में राजनीतिक अराजकता की एक तस्वीर हरियाणा का इतिहास दिल्ली के इतिहास के साथ एकदम जुड़ा रहा