स्मृति शेष मास्टर सतबीर द्वारा गाए सांग व किस्से भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, उधम सिंह, अंजना पवन, नल दमयन्ती, वीजा सोरठ, चापसिंह, जयमल फत्ता, पिंगला भरथरी, जानी चोर, शाही
स्मृति शेष मास्टर सतबीर द्वारा गाए सांग व किस्से भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, उधम सिंह, अंजना पवन, नल दमयन्ती, वीजा सोरठ, चापसिंह, जयमल फत्ता, पिंगला भरथरी, जानी चोर, शाही
सामाजिक न्याय हरियाणा इस वर्ष अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा है। ये 50 साल हर क्षेत्र में हुए बदलावों के गवाह हैं। हरित क्रांति के प्रभावों से कृषि पैदावार में
मेरे पांव लडख़ड़ाते हैं लेकिन मेरे हौसलों को कभी लडख़ड़ाने नहीं दिया क्योंकि मुझे बहुत आगे तक जाना है इन्हीं पांवों से चलकर और बस आगे बढ़ते जाना है।’
पर्यावरण देहात की मनोरम छटा में चार चांद लगाने वाले जोहड़ों का अस्तित्व खतरे में है। कभी लोकजीवन की अगाध श्रद्धा व आस्था के केंद्र रहे जोहड़ आज प्रदूषण के
फवाह की मारक शक्ति समाज को छिन्न-भिन्न कर सकती है, खून की नदियां बहा सकती है, तबाही का मन्जर और ना भरने वाले जख्मों को पैदा कर सकती है।हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन से पनपी सामाजिक दरार को पाटने के उद्देश्य से गठित किये गए सद्भावना मंच के राज्य सयोंजक के नाते मार्च और अप्रैल 2016 के राज्य भर में घूमते हुए अफवाह के खतरनाक चरित्र के व्यवहारिक पक्ष को समझने का मौका मिला। समझ में आया कि एक सामान्य घटना को अफवाह के माध्यम से अतिरंजित रूप में फैलाया जा सकता है और और जिसके भयंकर परिणाम निकल सकते हैं।
यदि तोर डाक सुने केउ न आसे तबे एकला चलो रे, एकला चलो, एकला चलो, एकला चलो रे। यदि केउ कथा न कय, ओरे ओ अभागा यदि सबाई थाके मुख फिराये, सबाई करे भय तबे परान खुले ओरे तुई मुख फुटे तोर मनेर कथा, एकला बोलो रे !ऑ यदि सबाई फिरे जाय, ओरे ओ अभागा! […]
संस्मरण कविता उसके आसपास थी, आसपास कहीं भी नहीं थी। इस विरोधाभास की सच्चाई क्या है? घर-परिवार, वातावरण, व्यवसाय, सब कविताविहीन। कविता उसके लिए बावड़ी की तरह थी, जिसके शीतल
पठनीय पुस्तक ‘यह पृथ्वी मेरी और सब की है और यह हमारे अस्तित्व की पहली शर्त है। इस पृथ्वी को मोल तोल की एक वस्तु के रूप में तबदील करना
सामयिकी पूरी दुनिया की नजर अमरीका पर है, ऐसा हर दस साल बाद होता है। नवम्बर 2014 में अमरीकी राष्ट्रपति का चुनाव होना है। अभी पद की उम्मीदवारी के चयन
दस्तावेज अमरीकी राष्ट्रपति-अब्राहिम लिंकन ने यह पत्र अपने लड़के शिक्षक को लिखा था। यह पत्र एक ऐतिहासिक दस्तावेज है। प्रिय गुरुजी, सभी व्यक्ति न्यायप्रिय नहीं होते, और न ही
विश्व साहित्य बर्टाेल्ट ब्रेख्त (बर्टाेल्ट आयगन फ्रीडरिक ब्रेख्त) नि:संदेह 20वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण लेखकों में से एक हैं। नाटक के क्षेत्र में उनका प्रभाव वैसा ही माना जा सकता
आलेख ये क्या जगह है दोस्तों, ये कौन सा दयार है फरवरी 2016 के कुछ दिन हरियाणा प्रदेश के लिए जलजले जैसे दिन थे। शायद इससे पहले इतना अराजक और
हरियाणवी लोक कथा एक गादड़ था, वो अपणा चौंतरा बणा कै, लीप-पोत कै, साफ-सुथरा राख्या करता। वो अपणा रोब भोत राख्या करता। वो न्यू जाणता के सारा जंगल तेरा कह्या
कभी कारीगरी थी शान, आज रोटी का नहीं इंतजाम विकास के दावों के बावजूद आज भी बहुत से समुदाय आर्थिक-सामाजिक पिछड़ेपन के अंधकूप में जीवन-यापन कर रहे हैं। अपने पूर्वाग्रहों
सुना कर अपनी अपनी जाने वालों सुनो मेरा तो किस्सा रह रहा है।
अत्यंत धीर, गम्भीर चसवाल साहेब सिद्धांतों के आदमी थे, बल्कि यह कहना ज्यादा ठीक होगा कि वह सिद्धांतों के नहीं, बल्कि एक ही सिद्धांत के आदमी थे। उसी सिद्धांत ने उनकी तमाम शायरी को प्रेरित किया और वह उनकी सभी गतिविधियों के पीछे दिखाई देता था। चसवाल साहेब किसी भी शक्ल में किसी का भी, कहीं भी कोई शोषण नहीं सह पाते थे और उसके विरुद्ध आवाज उठाना वह अपना पहला इन्सानी फर्ज समझते थे।