शिक्षा/स्वास्थ्य/रोजगार

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सेहत भारत में  1980-90 के दशकों तक ‘हस्पताल’ सुविधा ज्यादातर सरकारी या पब्लिक क्षेत्र में थी। आर्थिक उदारीकरण के बाद ढांचागत परिवर्तन से सरकारों ने निजी संस्थाओं के लिए सस्ती

पढ़ेंगे पढ़ाएंगे, जीवन सफल बनाएंगे, जहाज भी उड़ाएंगे, हम भी मास्टर बन जाएंगे, लड़का-लड़की एक समान, हम सब एक हैं, जैसे सलोगन प्रवासी मजदूरों के बच्चों के लिए शाम को

आलेख                 अगर आंकड़ों की नजर से देखें तो 1991 से लागू उदारीकरण, वैश्वीकरण व नीजिकरण की नीतियों के चलते भारत के सकल घरेलू उत्पादन में वृद्धि दर्ज हुई है।

अरुण कुमार कैहरबा अक्सर शिक्षा को लेकर सरकारी स्कूलों पर तोहमतें लगाई जाती हैं। अनेक खूबियों के बावजूद सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तुलना में कमतर बताया जा रहा

शिक्षा सांस्कृतिक प्रक्रिया है, समाजीकरण का माध्यम, शक्ति का स्रोत और शोषण से मुक्ति का मार्ग है। शिक्षा का व्यक्ति और समाज के विकास से गहरा रिश्ता है, विशेषकर आज की ज्ञान केन्द्रित व नियन्त्रित दौर में। समाज के विकास और बदलाव के साथ साथ शिक्षा व ज्ञान का चरित्र भी बदला है। शिक्षा-विमर्श के मुद्दे भी बदले हैं।

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