कबीर – अवधू दोनों दीन कसाई

साखी – कटू बचन कबीर के, सुनत आग लग जाय।
शीलवंत1 तो मगन भया, अज्ञानी जल जाय।।टेक

अवधू दोनों दीन कसाई।
चरण – हिन्दू बकरा मिण्डा मारे, मुसलमान मुर्गाई।
कांच खोल2 के करे हलाला, रक्त की नदिया बहाई।।
हिन्दू घड़ा छूवन नहिं देवे, छूते ही करे लड़ाई।
वेश्या के पायन तर3 सोवे, कहां गई हिन्दुआई।।
हिन्दुअन की हिन्दुआई देखी, तुर्कन की तुर्काई।
अल्ला राम का मरम4 न जाना, झूठी सौगंध खाई।।
मोटी जनेऊ बम्मन पेने, ब्राह्मणी को नहिं पेनाई।
जनमं-जनमं की भई वो सुद्रा, उने परस्यो5 तने6 खाई।।
नदी किनारे सुअर मरग्या, मछली नोंच कर खाई।
वो मछली तुर्कन ने खाई, कहां गई तुर्काई।।
मुसलमान और पीर औलिया, सब मिल पंथ चलाई।
कहे कबीर सुणो भई साधो, घर में करै सगाई।।

  1. विवेकी 2. धारदार हथियार 3. पास 4. मर्म (भेद) 5. परोसा हुआ 6. तूने

Leave a reply

Search
Loading

Signing-in 3 seconds...

Signing-up 3 seconds...

RETURNING FOR ANOTHER TRIP?