अफ्रीकी कहानी उनका कहना है कि मेरा जन्म घाना के मध्यभाग में स्थित एक बड़े गांव हसोडजी में हुआ। वे ऐसा भी कहते हैं कि जब सारा अफ्रीका सूखा-ग्रस्त था,
अफ्रीकी कहानी उनका कहना है कि मेरा जन्म घाना के मध्यभाग में स्थित एक बड़े गांव हसोडजी में हुआ। वे ऐसा भी कहते हैं कि जब सारा अफ्रीका सूखा-ग्रस्त था,
कहानी उठते ही मोबाइल पकड़ने लगा हूं। पकड़ने क्या अपने आप ही हाथ मोबाइल पर चला जाता है ठीक उसी तरह से जैसे सिग्रेट के प्यक्कड़ का हाथ सिग्रेट की
कहानी आज हरखू मिस्त्री सुबह-सवेरे चार बजे ही जाग नहा-धोकर, बेटे के ब्याह में समधियाने से भेंट में मिला सफेद ल_े का कुरता, पायजामा पहिन, सिर में ढेर सारा सरसों
कहानी छोटे कद, सांवली रंगत और पेज कट बालों वाली उस लड़की में सेवेन्टी एमएम दिमाग था और दिमाग में ईस्टमैन कलर का एक सपना! सपना कोई स्थिर चित्र नहीं
संस्मरण ललित कार्तिकेय का जन्म हरियाणा के सारन में हुआ। उन्होंने ‘हिलियम’, ‘तलछट का कोरस’, कहानी संग्रह, ‘सामने का समय’, आलोचना तथा देरिदा की ‘स्पेक्टर्स ऑफ माक्र्स’, सलमान रशदी के
आलेख महान लेखक प्रेमचंद के साहित्य से हर कोई परिचित है। उनके साहित्य में तत्कालीन सामाजिकशक्तियों की टकराहट-संघर्ष-आंदोलन स्पष्टत: मौजूद हैं। विकास नारायण राय का प्रस्तुत विशेष आलेख प्रेमचंद की
कहानी कहने को दिल्ली, पर दिल्ली-हरियाणा बार्डर से सटा गांव। बोली, बाना, रिवाज और लोग सब हरियाणवी। हल्की गर्मियों की सांझ चार बजे का समय है। मोहल्ले में सब अपने
यह एक कहानी है ….लेकिन आप सभी लोगों के लिए नहीं! आप में से केवल उन लोगों के लिए जो जीवन से प्यार करते हैं और जो आजाद
कहानी जब छोरे गाभरू होंगे ताजा लेकर खाने वाले मजदूरों व गरीब किसानों के लिए भादवे का महीना तेरहवां महीना होता है। जहां खाते-पीते लोग सावण-भादवे में घूम-घूम कर आ
कहानी संकट-मोचन क्योंकि वे बंदर थे अतः स्वाभाविक रूप से उनकी उछल-कूद, उनके उत्पात सब बंदरों वाले थे। गांव वाले उनसे तंग आ चुके थे। गांव के साथ कुछ
कहानी अंतोन चेखव का जन्म 19 वीं शताब्दी के रूढि़वादी रूस में हुआ था। इनकी मां के पास कहानियों का भण्डार था जिनको वो नियमित तौर पर बड़े रोचकपूर्ण तरीके
कहानी बचपन पूरे जीवन का माई-बाप होता है। बचपन के बाद अपना कद निकालता हुआ जीवन इसी बचपन की जुबान से ही बोलता-बतियाता है। इसके बावजूद इस नटखट बचपन का
कहानी ले परधान बीड़ी जला गांव के लगभग मध्य में बने मकान के सामने वाले चबूतरे पर चीेकट तहमद-कमीज धारण किए ‘परधान’ अक्सर बैठा रहता। उसके पैरों की जूती कभी
कहानी आग एस.आर. हरनोट शास्त्री वेदराम आज जैसे ही कुर्सी पर बैठने लगे तीसरी कक्षा के एक बच्चे बादिर ने उनसे पूछ लिया, गुरू जी! गुरू जी! हिन्दू क्या होता
'लेकिन उसकी खोळ के टुकड़े-टुकड़े होगे। ओठै लोवै-धोरै ए नामी-गिरामी बैद रह्या करदा। कछुए की घरआळी नै वा बैद बुलाया। बैद नै एक एक करकै कछुए के खोळ के सारे टुकड़े कट्ठे करके आपस म्हं चेप दिये। यू ए कारण है के आज बी कच्छओं का खोळ खुरदरा है अर उसमें लकीर-ए-लकीर हैं।
विश्व प्रसिद्ध रुसी कहानीकार अंटोन चेखव ने अपनी प्रसिद्ध कहानी गिरगिट में शासन-प्रशासन में फैला भ्रष्टाचार, जनता के प्रति बेरुखी और अफसरशाही की चापलूसी को उकेरा है। भारतीय संदर्भों में भी प्रासंगिक है। प्रस्तुत है इस कहानी का हरियाणवी अनुवाद। सं. ... खांसदा-खांसदा हरायुकिन बोल्या - जनाब मैं तो चुपचाप अपणै राह जाण लागर्या था। मैं अर मित्रिच लाकड़ियाँ बारे म्हं बात करण लाग रे थे के जिबे इस मरियल से कतुरिए नै मेरी आंगळी पै बुड़का भर लिया... इब देखो जी, मैं ठहर्या काम-धंधे आळा माणस ... मेरा तो काम बी आंगळियां का है, बड़े ध्यान तै करणा पड़ै। मन्नै तो हर्जाना चाहिए, इब एक हफ्ता तो मैं कुछ नीं कर सकदा, अर हो सकै है
दक्षिणी अफ्रीकी लेखिका पॉलिन स्मिथ (1882-1959) लघु कहानियों के लिए प्रसिद्ध है। प्रस्तुत कहानी में एक किसान अपनी जमीन बचाने के लिए अपनी बेटी को एक बूढ़े जमींदार के साथ ब्याह देने के लिये मजबूर है। औरत की दुविधा और व्यथा बड़ी गंभीरता से प्रस्तुत की है। भारतीय कृषि प्रधान समाज के सामंती भू-संबंधों में यह बेहद प्रासंगिक है। प्रस्तुत है काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी में अंग्रेजी विभाग में एसिसटेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत डॉ. देवेन्द्र कुमार द्वारा किया गया अनुवाद। सं.-