सृजनशाला

सृजनशाला 9 दिन की शोध कार्यशाला है। जिसमें शोधार्थी आधुनिक भारत में सामाजिक क्रांति के जनक जोतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के जीवन, कार्यों, सामाजिक सरोकारों, साहित्य और वर्तमान संदर्भों में उनकी प्रासंगिकता सबंधी विषयों पर नौ दिन तक अध्ययन, चिंतन व संवाद करते हैं।
इस दौरान शोधार्थी दो-ढाई हजार शब्दों का एक शोध-पत्र लिखना और विद्वानों के बीच प्रस्तुत करना अनिवार्य है। इस शोध पत्र को पत्रिका व अन्य माध्यमों में प्रकाशित करके प्रसारित किया जाता है।

सृजनशाला में कौन प्रवेश ले सकता है।

जोतिबा फुले व सावित्रीबाई फुले के जीवन, कार्यों, सामाजिक सरोकारों, साहित्य और वर्तमान संदर्भों में उनकी प्रासंगिकता सबंधी विषयों में प्रामाणिक रूचि वाले व्यक्ति

  • किसी भी विषय में नेट/जेआरएफ उत्तीर्ण अथवा किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय में किसी भी विषय में शोध-उपाधि के लिए पंजीकृत या उपाधि प्राप्त व्यक्ति
  • किसी विश्वविद्यालय, कालेज या स्कूल में कार्यरत शिक्षक
  • सामाजिक परिवर्तन में कार्यरत और लेखन का अनुभव। 

शर्ते/नियमावली

  • सृजनशाला व्यक्तिगत विनम्र प्रयास है। रचनात्मक माहौल निर्माण करने में सहयोग अपेक्षित है।
  • सृजनशाला में भाग लेने के लिए एक हजार रूपए जमा करके पंजीकरण करना अनिवार्य है। 
  • भोजन व आवास की व्यवस्था सत्यशोधक फाउंडेशन की ओर से होगी। 
  • शोध-स्थान (सत्यभूमि) को आश्रम और स्वयं को एक सत्यशोधक तथा इस अवधि को सत्य-साधना काल समझते हुए अपने व्यक्तिगत सभी कार्य स्वयं सम्पादित करेंगे।
  • यहाँ रहते हुए कुल दो-ढाई हज़ार शब्दों का एक पूर्णतः मौलिक शोध आलेख तैयार करेंगे जिसे विद्वानों की उपस्थिति में प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
  • शोध आलेख की सॉफ्ट व लिखित प्रति जमा करनी अनिवार्य होगी। समीक्षा के उपरांत प्रकाशन किया जायेगा।
  • सृजनशाला में भाग लेने, शोध-पत्र लिखने व प्रस्तुत करने संबंधी प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा।
  • शोध अवधि के नौवें दिन कुरुक्षेत्र की ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा करायी जायेगी।
  • शोध की अवधि (नौ दिनों) तक आपको अनिवार्यतः संस्थान में रहकर अपना शोध कार्य पूरा करना होगा। किसी भी परिस्थिति में परिसर से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी।
  • परिसर में किसी ऐसे पदार्थ का सेवन पूर्णतः वर्जित है जो मन-मस्तिष्क और शरीर तथा यहाँ के वातावरण को दुष्प्रभावित कर सकता है।
  • किसी भी प्रकार के अशोभनीय व्यवहार के लिए तुरंत परिसर से बाहर किया जा सकता है।
  • किसी भी प्रकरण में आयोजकों का निर्णय मान्य होगा।

सृजनशाला कहां होती है

सत्यभूमि, बाबैन रोड़ (राधा-स्वामी सत्संग भवन के पास), कुरुक्षेत्र। सत्यभूमि, पीपली (कुरुक्षेत्र) से अंबाला की ओर जी.टी. रोड़ पर चार किलोमीटर चलने के बाद दाएं तरफ बाबैन रोड़ पर एक किलोमीटर की दूरी पर है।

सृजनशाला के दौरान दिनचर्या

प्रत्येक दिन अध्ययन, चिंतन-मनन, संवाद, सामूहिक अध्ययन, चर्चा-परिचर्चा के साथ-साथ विभिन्न किस्म की सीखने की गतिविधियां रहेंगी। एक दिन कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक स्थल पर जाने का रहेगा। विद्वानों के समक्ष शोध-पत्र की प्रस्तुति होगी और प्रमाण-पत्र वितरण के साथ विदाई समारोह आयोजित होगा।

  • चाय प्रात: 7 बजे
  • श्रमदान व व्यायाम प्रात: 7.15 से 8 बजे
  • व्यायाम व स्नान व नाश्ता: 8 से 9.30 बजे
  • स्वाध्याय : 9.30-11 बजे
  • चाय : 11-11.15 बजे
  • स्वाध्याय : 11.15-1.00 बजे
  • भोजन व आराम : दोपहर 1 से 3 बजे
  • स्वाध्याय: 3 से 5 बजे
  • चाय : 5 बजे
  • परस्पर संवाद : सायं 5.30 से 7.30
  • भोजन : रात्रि 8-9.00 बजे
  • स्वरूचि का कार्य : 9-10,30 बजे
  • विश्राम: 10.30 बजे

साथ क्या लाना आवश्यक है

  • पेन कापी लैपटॉप
  • दैनिक प्रयोग सामग्री

शोध आलेख का प्रारूप

  • शीर्षक
  • सारांश
  • बीज शब्द
  • प्रस्तावना
  • शोध उद्देश्य
  • विषय विश्लेषण
  • निष्कर्ष

संदर्भ सूची (संदर्भ संख्या 10-12)

शोध आलेख का फार्मेट

मार्जिन- 1.5
फाँट- यूनिकोड
साइज-टाइटल-18
हेडिंग-16
सब हेडिंग-14
टेक्स्ट-12
लाईन स्पेस-1.5

आवेदन फार्म

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