तेंदुआ- अमित मनोज

हाल फिलहाल जंगल से सटे रिहाइशी इलाकों में तेंदुओं के घुसने की ख़बरों में बढ़ोतरी हुई है। असल सवाल यह है कि कहीं आदमी तो तेंदुओं के रिहाइशी इलाके में

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हाल फिलहाल पढ़ी गई पुस्तकों से गुजरते हुए- गौरव

सामान्य पाठक के तौर पर जब मुझे पुस्तकें पढ़ने का शौक हुआ तो मुझे अलग- अलग तरह की बैचेनी पैदा हुई जिन्होंने मेरे दिमाग में उथल- पुथल मचा दी। हालांकि

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बेहतर व्यवस्था के लिए जूझता नुक्कड़ नाटक -अरुण कुमार कैहरबा

नाटक पुराने कला रूपों में से एक है। इसमें सभी कलाओं का समावेश होता है। आदिम युग में संभवत: भाषा का विकास भी नहीं हुआ होगा, तब भी अभिनय के

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गोलेन्द्र पटेल की कविताएँ

गोलेंद्र पटेल की ये कविताएँ किसानी चेतना से ओत प्रोत हैं। यह जमींदार वाली भारी भरकम किसानी के बरक्स हाशिए पर सिमटे एक दलित और मजदूर की किसानी है। इसी

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चूड़ियाँ – अमित मनोज

अमित मनोज की कहानियों में गजब की सादगी है। ‘चूड़ियाँ’ कहानी में अमित मनोज ने गाँव देहात में व्याप्त तुच्छ ईर्ष्या प्रेरित जटिल अमानवीय घटनाओं को सरलता से चित्रित किया

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डॉ. अशोक भाटिया से अशोक बैरागी की बातचीत

अशोक बैरागी : अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि के विषय में कुछ बताइए? डॉ. अशोक भाटिया : मेरी पारिवारिक पृष्ठभूमि 1947 के भारत-पाक विभाजन की त्रासदी से जुड़ी है। मेरे पिता जी

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लद्दाख आंदोलन के समर्थन के लिये अपील: युथ फॉर हिमालय

लद्दाख की जनता की शांतिपूर्ण पश्मीना मार्च को धारा 144 लगाकर रोकना सरासर लोकतंत्र की हत्या है! लद्दाख की जनता के संघर्ष के समर्थन में अपनी-अपनी जगह पर पश्मीना मार्च

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सपना भट्ट के साथ योगेश की बातचीत

योगेश – आपकी कविताएँ शानदार हैं। इतनी बढ़िया कविताएँ एक अरसे बाद पढ़ी हैं। आपकी कविताओं के सम्बन्ध में मेरी कुछ जिज्ञासाएं हैं। सपना भट्ट– आपको कविताएँ भली लगीं यह

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स्टीफन हॉकिंग को याद करते हुए – सुनील कुमार

दुनिया के रहस्यों पर से पर्दा उठाने वाले अद्वितीय उद्भोधक महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को हाल ही में उनकी पुण्यतिथि पर दुनिया भर में याद किया गया। स्टीफन हॉकिंग एक

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मलबे के नीचे दबा विकारग्रस्त समाज – अरुण कैहरबा

प्रख्यात सर्जन, प्रोफेसर, सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक डॉ. रणबीर सिंह दहिया का उपन्यास मलबे के नीचे हरियाणा की सामाजिक व्यवस्था की सर्जरी करने का सफल प्रयास है। उपन्यास स्वास्थ्य व्यवस्था,

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