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‘हम नहीं रोनी सूरत वाले’ : सावित्रीबाई फुले की कविताई     

बजरंग बिहारी तिवारी जीवन की गहरी समझ के साथ काव्य-रचना में प्रवृत्त होने वाली सावित्रीबाई फुले (1831-1897) अपने दो काव्य-संग्रहों के बल पर सृजन के...

‘वेटिंग फॉर वीजा ‘ – डॉ. भीम राव आंबेडकर

'वेटिंग फॉर वीजा ' डॉ. भीम राव आंबेडकर डॉ. भीमराव आंबेडकर की पुस्तिका 'वेटिंग फॉर वीजा' संयुक्त राज्य अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल...

शानदार तोहफा – जोतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले और डा. भीम राव अम्बेडकर की संपूर्ण रचनाएं – सत्यशोधक फाऊंडेशन

पीडीएफ फार्मेट में पढ़ने और डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें जोतिबा फुले की संपूर्ण रचनाएं जोतिबा फुले संपूर्ण रचनावली जोतिबा फुले जीवनी – एन.सी.आर.टी.ई. ...

राजभाषा संबंधी संवैधानिक प्रावधान

हिन्दी को भारत की राजभाषा के रूप में 14 सितम्बर सन् 1949 को स्वीकार किया गया । इसके बाद संविधान में राजभाषा के सम्बन्ध में धारा 343 से 352 तक की व्यवस्था की गयी...

पीर बुद्धू शाह – सुरेन्द्रपाल सिंह

पीर बुद्धू शाह अपने चार पुत्रों, दो भाइयों और 700 अनुयायियों के साथ सढोरा से चलकर गुरु गोबिन्द सिंह के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़े। इस लड़ाई में गुरु की फौज को जीत तो हासिल हुई, लेकिन पीर बुद्धू शाह के दो पुत्र अशरफ शाह और मोहम्मद शाह व भाई भूरे शाह शहीद सहित 500 अनुयायी शहीद हुए।

सोंद्या कै तो काटड़े ही जामें

हरियाणवी लोककथा एक गाम म्हं दो पाळी आपणे डांगर चराया करदे। एक रात नै दोनों की म्हैस ब्याण का सूत बेठग्या। उनमैं जो आलसी था वो बोल्या भाई मैं नींद काढल्यूं। मेरी म्हैंस नै संभाळ...

निजी स्कूल शिक्षा के प्रति बढ़ रहा असंतोष

दीपक राविश किसी भी जागरूक एवं विकासशील समाज को शिक्षा-व्यवस्था पर लगातार विचार-विमर्श करते हुए से धारदार बनाने के प्रयास करते रहने चाहिएं। किसी समाज की शिक्षा-व्यवस्था जितनी चुस्त-दुरुस्त तथा समाजपयोगी होगी, वह समाज उतना...

बुद्ध के सिंद्धांत और उपदेश – डा. भीमराव आंबेडकर

डा. आंबेडकर ने एक पुस्तक लिखी 'बुद्ध अथवा कार्ल मार्क्स '। इसमें दोनों दार्शनिकों के सिद्धातों की तुलना की।उन्होंने यह इस उम्मीद से किया था कि इससे वर्तमान में चल रहे विमर्श पर जरूर असर पड़ेगा...
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