ग़ज़लें – मनजीत भोला

1. कौन कहता है तुझे तू दीपकों के गीत गाज़ुल्मतों का दौर है तो ज़ुल्मतों के गीत गाक्या खबर है फूल कोई खिल उठे इंसाफ काइस चमन में बागबां की

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कुंठित व्यक्ति क्रांति नहीं ला सकते : महादेवी वर्मा

किताबों में देखी तसवीर से रत्तीभर भी अंतर नहीं। वैसा ही सौम्य चेहरा, 80 वर्ष की हो जाने के कारण चेहरे पर झुर्रियां, उनमें झलकती एक युग की वेदना, चेहरे

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महात्मा गांधी – रविन्द्र नाथ टैगोर

भारतवर्ष की अपनी एक सम्पूर्ण भौगोलिक प्रतिभा है। पूर्व-प्रान्त से लेकर पश्चिम- प्रान्त तक, उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक भारत की जो एक विशिष्ट पूर्णता है

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भगत सिंह की कुरबानी पर आल्हा गाने निकला हूँ – शैलेन्द्र सिंह

भगत सिंह की कुरबानी पर आल्हा गाने निकला हूँ,आज़ादी के दर्पण की मैं धूल हटाने निकला हूँ।शत-शत कोटिक नमन लेखनी भगत सिंह की करनी को,ऐसा बालक जनने वाली वीर प्रसूता

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देवताओं के विरुद्ध कविता – योगेश

कविता,क्या तुम नहीं जानती कि मैं कभी तुमसे अलग नहीं हो सकता? क्या मैं अपने अंतर में जन्म लेने वाली सभी खुशियों, सभी आंसुओं से अलग हो सकता हूँ? रसूल

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बुद्ध की कहानी और शिक्षा – जवाहर लाल नेहरु

बुद्ध की कहानी बुद्ध की कहानी ने मुझे बचपन में ही आकर्षित किया था और मैं युवा सिद्धार्थ की तरफ खिंचा था, जिसने बहुत-से अन्तद्वंद्वों, दुःख और तप के बाद

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स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना से सराबोर बाल उपन्यासिका – अरुण कैहरबा

पुस्तक समीक्षापुस्तक : जीतेंगे हमलेखक : साबिर हुसैनप्रकाशक : राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारतपृष्ठ-56मूल्य : रु. 90. स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना से सराबोर बाल उपन्यासिकाकिताब पाठकों में पैदा कर रही देश भक्ति

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जैसा भोजन वैसे मनुष्य का दर्शन – मुद्राराक्षस

उन्नीसवीं सदी के समाज विचारक और दार्शनिक लुडविग फायर बाख ने मनुष्य की सामाजिक ऐतिहासिक भूमिका पर विचार करते हुए एक बहुत दिलचस्प बात की थी- मनुष्य वही होता है

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लघुकथाएँ – खलील जिब्रान

1. इंसाफ़ एक रात शाही महल में एक भोज हुआ। इस मौके पर एक आदमी आया और उसने शहजादे के सामने नमन किया। सभी मेहमान उसकी तरफ़ देखने लगे। देखा

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हिन्दुस्तानी संस्कृति का अटूट सिलसिला – जवाहर लाल नेहरु

इस तरह शुरू-शुरू के दिनों में हम एक ऐसी सभ्यता और संस्कृति का आरम्भ देखते हैं, जो बाद के युगों में बहुत फली-फूली और पनपी और बावजूद बहुत-सी तब्दीलियों के

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