देस हरियाणा पढ़िये समय के साथ चलिये

परिवार और महिला की आजादी- अनुवाद – सोनिया

सवालों की मर्यादा से बाहर मत जाओ गार्गी वरना सिर धड़ से अलग कर दिया जाएगा ऋषि याज्ञवल्क्या ने जनक राजा के दरबार में शास्त्रार्थ के दौरान विदुषी गार्गी को

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एक ‘असफल प्रयास’ की सफलता – राजेंद्र चौधरी

देश चुनाव की दहलीज़ पर है. पूरी कोशिश होनी चाहिए कि सरकार जनता के प्रति समर्पित एवं जवाबदेह हो. बेहद ज़रूरी है ऐसी सरकार का होना परन्तु काफ़ी कुछ है

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कबीर और बाबा नागार्जुन के बहाने – योगेश

योगेश शर्मा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के हिंदी विभाग में शोधार्थी हैं और देस हरियाणा पत्रिका टीम का हिस्सा हैं। नई सदी के पहले दो दशकों की हिंदी कविता को भाषा

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संत रैदास को याद करते हुए – अरुण कैहरबा

उपजे एक बूंद तै का बामन का सूद। मूरख जन ना जानई सबमैं राम मौजूद।। रविदास जन्म के कारनै होत न कोऊ नीच। नर कूं नीच करि डारि है, ओछे

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कोई दूसरा लोग – सुरेन्द्र पाल सिंह

सुरेन्द्र पाल सिंह हरियाणा की लोक–संस्कृति को पैनी इतिहास बोध भरी दृष्टि से देखते रहे हैं लेकिन इधर अब उनकी दिलचस्पी कविताओं के अनुवाद और कहानी लेखन में बढ़ी है।

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कानून की गैर कानूनियां – अपने ही किसानों पर ड्रोन से बंब बरसाती सरकार – अमनदीप सिंह

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर युद्धों में मानव रहित विमान (UAV, unman aerial vehicle) का जमकर इस्तेमाल हो रहा है।  2021 में उस समय भारतीय सेना के अध्यक्ष रहे जनरल मनोज मुकुंद

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सुंदरी के सौंदर्य से सराबोर ‘सुंदरबन’ -सुरेन्द्र पाल सिंह  

गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदियों के बीच एक विशाल डेल्टा में अनजाने से नामों वाली अनेक छोटी बड़ी नदियाँ हैं, बंगाल की खाड़ी का बैकवॉटर है, खारे पानी में उगने

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ओ मेरी कविता कहाँ हैं तेरे श्रोता ? – राजेश जोशी

ओ मेरी कविता कहाँ हैं तेरे श्रोता? कमरे में कुल बारह लोग और आठ खाली कुर्सियाँ- चलो अब शुरू करते हैं यह सांस्कृतिक कार्यक्रम कुछ लोग और अंदर आ गये

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पिता-पुत्री के रिश्ते को चित्रित करता उपन्यास “रूदादे-सफ़र” –  डॉ. सुधा ओम ढींगरा

पंकज सुबीर एक ग़ज़लकार, संपादक, कथाकार और उपन्यासकार हैं। कई कहानियों के साथ-साथ पहले तीन उपन्यास ‘ये वो सहर तो नहीं’, ‘अकाल में उत्सव’ और ‘जिन्हें जुर्म-ए-इश्क़ पर नाज़ था’

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सूत की डोरी – योगेश

योगेश शर्मा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के हिंदी विभाग में शोधार्थी हैं। आधुनिक हिंदी कविता को भाषा बोध और दर्शन के परिप्रेक्ष्य में देखने समझने में रूचि है। बसंत आ गया।

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