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फ्लाई किल्लर

एस. आर. हरनोट (एस. आर. हरनोट शिमला में रहते हैं। हिंदी के महत्वपूर्ण कहानीकार के साथ-साथ साहित्य को जन जीवन में स्थापित करने के लिए

सामयिक

जनपक्षीय राजनीति का मार्ग प्रशस्त करें

प्रोफेसर सुभाष चंद्र                    सेवा देश दी जिंदड़िए बड़ी ओखी, गल्लां करणियां ढेर सुखल्लियां ने। जिन्नां देश सेवा विच पैर पाइया उन्नां लख मुसीबतां

विरासत

पंज प्यारे – जातिवाद पर कड़ा प्रहार और जनवाद का प्रतीक

अपना शीश देने के लिए तैयार हुए पांचों व्यक्तियों में से ज्यादा समाज द्वारा नीची समझी जाने वाली जातियों में थे और खासतौर पर दस्तकार थे। उनमें से एक खत्री था, एक जाट, एक धोबी, एक नाई और एक कुम्हार था। इस से पता चलता है कि गुरु गोबिंद सिंह जी को तमाम जातियों और खासकर छोटी समझी जाने वाली जनता का अपार समर्थन था। उसे मेहनतकश किसान और मजदूरों का समर्थन हासिल था। उसे व्यापारी वर्ग का समर्थन था।

हरियाणा का इतिहास-प्रतिहारों तथा तोमरों का शासन

बुद्ध प्रकाश हर्ष के पश्चात् उत्तरी भारत इतना कमजोर हो गया कि उस पर कोई भी कब्जा कर सकता था। चीन-तिब्बती आक्रमण से स्थिति अनिश्चित

सामाजिक न्याय

छाती, तू और मैं – निकिता आजाद

निकिता आजाद (युनिवर्सिटी ऑफ आक्सफोर्ड) में पढ़ी हैं। उन्होंने  ‘हैपी टु ब्लीड’ लिखे सैनिटरी नैपकिन के साथ अपनी तसवीर पोस्ट करते हुए लोगों को पितृसत्तात्मक

लोकधारा

सासड़ होल़ी खेल्लण जाऊंगी

मंगतराम शास्त्री सासड़ होल़ी खेल्लण जाऊंगी, बेशक बदकार खड़े हों। री मनै पकड़ना चावैंगे, जाणूं सूं जाल़ बिछावैंगे ना उनकै काबू आऊंगी, कितनेए हुशियार खड़े