धर्म/साम्प्रदायिकता/साझी संस्कृति

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इतिहास हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में यमुना नदी के किनारे एक शहर की स्थापना दसवें पातशाह साहिब श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी द्वारा हुई थी। इस शहर को पांवटा

व्यक्तित्व मैं तब साढ़े तीन बरस का था। सिडनी, मेरा भाई, मुझसे चार बरस बड़ा था। मां थिएटर कलाकार थीं, हम दोनों भाइयों को बहुत प्यार से लिटाकर थिएटर चली

साखी – पंडित और मशालची1, दोनों को सूझे नाहि। औरन को करे चांदनी, आप अंधेरा मांई।।टेक पंडित तुम कैसे उत्तम कहाये। चरण – एक जाइनि2 से चार बरन3 भे, हाड़

कविताJune 28, 2018

साखी – पूरब दिशा हरी को बासा, पश्चिम अल्लह मुकामा। दिल में खोजि दिलहि मा खोजे, इहै करीमा रामा।।टेक – म्हारो हीरो हेराणो कचरा में, पांच पचीस का झगड़न में।

साखी – बैस्नों भया तो क्या भया, बूझा नहीं विवेक। छापा तिलक बनाई करि, दुविधा लोक अनेक।। टेक – पंडित छाण पियो जल पाणी, तेरी काया कहां बिटलाणी1। चरण –

कविताJune 28, 2018

साखी – मन मंदिर दिल द्वारखा, काया काशी जान। दस द्वारे का पिंजरा, याहि2 में ज्योत पहचान।। टेक तन काया का मंदिर साधु भाई, काया राम का मंदिर। इना मंदिर

साखी – पाथर पूजत हरि मिले, तो मैं पूजु पहाड़। वा से तो चाकी भली, पीस खाये संसार।।टेक धातु की धेनु दूध नही देती रे बीरा म्हारा, धातु की धेनु

साखी -ऐसी मति संसार की, ज्यों गाडर1 का ठाठ2। एक पड़ा जेहि गाड़3 में, सबै जाहि तेहि बाट।।टेक -क्यों भूलीगी थारो देस दीवानी क्यों भूलीगी थारो देस हो-चरण -भूली मालन4

साखी – एकै त्वचा हाड़ मूल मूत्रा, एक रुधिर एक गूदा। एक बूंद से सृष्टि रची है, को ब्राह्मण को शुद्रा।।टेक साधौ, पांडे निपुन कसाई। चरण – बकरी मारि भेड़ी

चीजों का वायदा करके इन धोखेबाजों ने सत्ता हथिया ली। लेकिन वे झूठे हैं, वे अपना वायदा पूरा नहीं करते, वे कभी नहीं करेंगे। तानाशाह खुद को आजाद कर लेते हैं, लेकिन जनता को गुलाम बना देते हैं। हम दुनिया को आजाद करने की लड़ाई लड़ें...राष्ट्रीय बाड़ों को हटा देने की लड़ाई, लोभ, नफरत व असहिष्णुता को उखाड़ फैंकने की लड़ाई! एक ऐसी दुनिया के लिए लड़ें, जहां विज्ञान और उन्नति हम सबके लिए खुशियां लेकर आए। सैनिकों, लोकतंत्र के नाम पर हम सब एक हो जाएं।

लोक नायक गोगा जी कौन थे? जिनकी गाथा गांव-गांव आज भी गाई जाती है। आज के वक्त में, जबकि जातीय संघर्ष उबल रहे हैं, साम्प्रदायिकता उफान पर है। ऐसे में

हलचल डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल अध्ययन संस्थान, कुरुक्षेत्र द्वारा 26 जून 2016 को डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल स्मृति व्याख्यान-7 का आयोजन किया। विषय था ‘भारतीय लोकतंत्र: दशा और दिशा’। इसकी अध्यक्षता प्रो.

आलेख ब्राह्मणवाद की विचारधारा ने श्रम-जन्य कर्मों का तिरस्कार करते हुए वर्णधर्मी व्यवस्था के अंतर्गत उत्पादनशील श्रेणियों का शोषण बनाए रखा है।  कबीर की वाणियों में इस ब्राह्मणिक विचारधारा का

आलेख कबीर दास मध्यकालीन भारत के प्रसिद्घ संत हैं, जिन्होंने अपनी रचनाओं में हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रयास किया तथा ब्राह्मणवादी धार्मिक आडम्बरों की आलोचना की। इनकी प्रसिद्घ रचनाएं ‘बीजक’ में

विविधJune 19, 2018

आलेख ये क्या जगह है दोस्तों, ये कौन सा दयार है फरवरी 2016 के कुछ दिन हरियाणा प्रदेश के लिए जलजले जैसे दिन थे। शायद इससे पहले इतना अराजक और

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