देस हरियाणा7- Page

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कविता तुम्हारे घर के किवाड़ जानती हूं तुम्हारे घर की ओर मुड़ते हुए मुझे नहीं सोचना चाहिए कि मुझे तुम्हारे घर की ओर मुडऩा है, तुम्हारी दहलीज पर आकर नहीं

 कविता झरना अनंत कालों से बहता झरना इतना शांत कभी नहीं देखा ऐसा क्या हुआ? कि – न जल के गिरने का शोर सुनता है और न बहने का। स्रोतः

कविताJune 19, 2018

 कविता यदि लड़की भी होती मनुष्य लड़की को हक नहीं होता प्रेम करने का लेकिन, आते-जाते, घूमते-फिरते, छिपते-छिपाते कपड़े छत पर सुखाते-उतारते भी प्राय: हो ही जाता है प्रेम कहीं

 कविता एक चुप्पी एक चुप्पी हवा को बहने नहीं देगी आज कोलाहल कोई छूट गया पीछे सांसों का चलना तो दूर धड़कन का संपन्दन तक जैसे विराम हो गया हो

वक्तव्य प्रस्तुति-  गुंजन कैहरबा इन्द्री (करनाल) स्थित रविदास मंदिर के सभागार में 10 अप्रैल, 2016 को बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर की 125वीं जयंती और महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती के

संवाद 7 अप्रैल 2016 को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में ‘देस हरियाणा’ पत्रिका के तत्वाधान में ‘अपने लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम हुआ, जिसमें ‘आजादी मेरा ब्रांड’ की लेखिका अनुराधा बेनीवाल ने

कविता नमस्ते भतेरा ढो लिया तेरी कल्चर का बोझ, इब चलाइए ट्रैक्टर रोज। आधी धरती आधा घर, पूरी पढ़ाई, बणु अफसर। देखणी मैंने दुनिया सारी, छोड़ दी या सरम की

कविताJune 19, 2018

कविता कंठी ना चाहंदी, खेत चहिये तीळ ना चाहंदी, रेत चहिये घर भी मैं आपे बणा ल्यूंगी माँ-बाबू तेरा हेज चहिये। दूस्सर नहीं, मेरी किताब जोड़ ले कॉलेज यूनिवर्सिटी में

कविता मैंने देखी एक लड़की आज मैंने एक लड़की देखी नदी किनारे पगडंडी पे इठलाती कान में ईयरफोन लगाए, संगीत पे लहराती लड़की देखी आज मैंने एक लड़की देखी। मेरे

संवाद 7 अप्रैल 2016 को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में ‘देस हरियाणा’ पत्रिका के तत्वाधान में ‘अपने लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम हुआ, जिसमें ‘आजादी मेरा ब्रांड’ की लेखिका अनुराधा बेनीवाल ने

संवाद 16 मार्च 2016 को देस हरियाणा पत्रिका की ओर से ‘युवा पीढ़ी और शहीद भगत सिंह की विचारधारा’ विषय पर सेमीनार आयोजित किया, जिसमें शहीद भगत सिंह के भानजे

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की एक किताब है ‘ग़ुबार-ए-ख़ातिर’ यानी दिल के ग़ुबार। यह किताब उन ख़तों का मज्मूआ है जो उन्होंने 1942 में अपनी गिरफ़्तारी के बाद अहमदनगर कि़ले

रागनी आरक्षण का मुद्दा देखा किसा माहौल बणा ग्या रै हरे-भरे हरियाणे ने किस तरियां झुळसा ग्या रै – (टेक) राजनीति का स्वार्थ मन म्हं, नेता फायदा ठा रे थे

आलेख ब्राह्मणवाद की विचारधारा ने श्रम-जन्य कर्मों का तिरस्कार करते हुए वर्णधर्मी व्यवस्था के अंतर्गत उत्पादनशील श्रेणियों का शोषण बनाए रखा है।  कबीर की वाणियों में इस ब्राह्मणिक विचारधारा का

आलेख कबीर दास मध्यकालीन भारत के प्रसिद्घ संत हैं, जिन्होंने अपनी रचनाओं में हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रयास किया तथा ब्राह्मणवादी धार्मिक आडम्बरों की आलोचना की। इनकी प्रसिद्घ रचनाएं ‘बीजक’ में

विविधJune 19, 2018

दस्तावेज अमरीकी  राष्ट्रपति-अब्राहिम  लिंकन ने यह पत्र अपने लड़के  शिक्षक को लिखा था। यह पत्र एक ऐतिहासिक दस्तावेज है। प्रिय गुरुजी,                 सभी व्यक्ति न्यायप्रिय नहीं होते, और न ही

विश्व साहित्य बर्टाेल्ट ब्रेख्त (बर्टाेल्ट आयगन फ्रीडरिक ब्रेख्त) नि:संदेह 20वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण लेखकों में से एक हैं। नाटक के क्षेत्र में उनका प्रभाव वैसा ही माना जा सकता

आलेख ये क्या जगह है दोस्तों, ये कौन सा दयार है फरवरी 2016 के कुछ दिन हरियाणा प्रदेश के लिए जलजले जैसे दिन थे। शायद इससे पहले इतना अराजक और

कुछ बदहवास और कुछ संभलते-संभालते फरवरी 2016 में हरियाणा के कई शहरों ने विशेषकर रोहतक में वो मंजर देखा, जिसकी शायद किसी ने कभी कल्पना न की हो। आरक्षण आंदोलन

 कविता अधबने फूल की हिमायत में उस स्कूल में बहुत से चित्र थे एक बच्चा चिंतित था क्यूंकि होमवर्क पूरा नहीं था एक बच्चे को ज़ोर की भूख लगी थी

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