कविता
आज मैंने एक लड़की देखी
नदी किनारे पगडंडी पे इठलाती
कान में ईयरफोन लगाए,
संगीत पे लहराती लड़की देखी
आज मैंने एक लड़की देखी।
मेरे पीछे चलने से बेख़बर
आगे से आते नौजवानों से ना-घबराती
मचलती इठलाती
मस्त हवा में जम्प लगाती लड़की देखी
आज मैंने एक लड़की देखी।
बीच-बीच में रुक जाती
बसंत के फूल निहारती
पेड़ों की डाल को छूती
घास पे लोट जाती लड़की देखी
आज मैंने एक लड़की देखी।
एक अकेली
मुस्कुराती, गुनगुनाती, झूमती, लहराती
आज मैंने एक लड़की देखी।
स्रोतः सं. सुभाष चंद्र, देस हरियाणा( मई-जून 2016) पेज- 52