देस हरियाणा13- Page

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“होंदा सी इत्थे शख्स़ इक सच्चा जाणे किदर गया जद दो दिलां नूं जोड़दी एक तार टुट गई- जद दो दिलां नूं जोड़दी एक तार टुट गई, साजिंदे पुछदे साज नूं नग़मा किदर गया, सब नीर होए गंदले, शीशे होए धुंधले इस तरह हर शख्स़ पुछदा हे, मेरा चेहरा किदर गया सिक्खां, मुसलमाना ते हिंदुआं दी पीड़ विच रब ढूंढदा फिरदा, मेरा बंदा किदर गया दुःख दी ज़मीं नू पुछदा अल्लाह किदर गया पातर नू जाण-जाण के पुछदी है आज हवा रेतां ते तेरा नाम लिख्या सी, जाणे किदर गया   

इस समय, देश में धर्म की धूम है। उत्पात किए जाते हैं, तो धर्म और ईमान के नाम पर और जिद्द की जाती है तो धर्म और ईमान के नाम पर। रमुआ पासी और बुद्धू मियां धर्म और ईमान को जानें या न जानें, परंतु उसके नाम पर उबल पड़ते हैं और जान लेने और जान देने के लिए तैयार हो जाते हैं। देश के सभी शहरों का यही हाल है। उबल पड़ने वाले साधारण आदमी का इसमें केवल इतना ही दोष है कि वह कुछ भी नहीं समझता-बूझता और दूसरे लोग उसे जिधर जाने देते हैं, उधर जुत जाता है। यथार्थ दोष है, कुछ चलते-पुरजे, पढ़े-लिखे लोगों का, जो मूर्ख लोगों की शक्तियों और उत्साह का दुरुपयोग कर रहे हैं कि इस प्रकार, जाहिलों के बल के आधार पर उनका नेतृत्व और बड़प्पन कायम रहे। इसके लिए धर्म और ईमान की बुराइयों से काम लेना उन्हें सबसे सुगम मालूम पड़ता है। सुगम है भी।

सृजन उत्सव के दौरान 25 फरवरी को ‘पत्र-पत्रिकाएः साहित्यिक सरोकार एवं प्रसार’ विषय पर परिसंवाद का आयोजन हुआ। जिसमें ‘युवा संवाद’ पत्रिका के संपादक डा. अरुण कुमार, ‘बनास जन’ पत्रिका के संपादक पल्लव, ‘हंस’ पत्रिका से संबंद्ध विभास वर्मा तथा ‘अहा-जिंदगी’ के पूर्व संपादक आलोक श्रीवास्तव ने शिरकत की। इसका संयोजन किया ‘देस हरियाणा’  के संपादन सहयोगी डा. कृष्ण कुमार ने। प्रस्तुत है चर्चा की रिपोर्ट- सं.

कहानीMay 16, 2018

विश्व प्रसिद्ध रुसी कहानीकार अंटोन चेखव ने अपनी प्रसिद्ध कहानी गिरगिट में शासन-प्रशासन  में फैला भ्रष्टाचार, जनता के प्रति बेरुखी और अफसरशाही की चापलूसी को उकेरा है। भारतीय संदर्भों में भी प्रासंगिक है। प्रस्तुत है इस कहानी का हरियाणवी अनुवाद। सं. ... खांसदा-खांसदा हरायुकिन बोल्या - जनाब मैं तो चुपचाप अपणै राह जाण लागर्या था। मैं अर मित्रिच लाकड़ियाँ बारे म्हं बात करण लाग रे थे के जिबे इस मरियल से कतुरिए नै मेरी आंगळी पै बुड़का भर लिया... इब देखो जी, मैं ठहर्या काम-धंधे आळा माणस ... मेरा तो काम बी आंगळियां का है, बड़े ध्यान तै करणा पड़ै। मन्नै तो हर्जाना चाहिए, इब एक हफ्ता तो मैं कुछ नीं कर सकदा, अर हो सकै है

 गतिविधियां कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के सभागार में देस हरियाणा की तरफ वरिष्ठ कवि ओम प्रकाश करुणेश के हाल ही में प्रकाशित हुए काव्य संग्रह ‘बुत गूंगे नहीं

कल्पित तुझे सलाम गुरबख्श  सिंह मोंगा अनुसूचित जाति के कल्पित वीरवाल द्वारा आई.आई.टी. की प्रवेश परीक्षा में सौ फीसदी अंक लाना बताता है कि प्रतिभा किसी जाति विशेष की जागीर

गतिविधियां 28 जुलाई 2016 को शहीद उधम सिंह राजकीय महाविद्यालय मटक माजरी में ‘स्वतंत्रता आंदोलन और उधम सिंह’ विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। यह सेमिनार ‘देस हरियाणा’

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