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कविता आइये देखें आइये देखें रोज़-रोज़ गिरावट की नित-नयी किस्में.. नाचती हुई नायिका के थिरकते हुए नितम्ब.. और नायक का निगेटिव शेड, हंसोकड़ी.. अवसर की चौपड़ सजाते लोग.. पसरते हुए

कविता विदाई समारोह एक विदाई समारोह देखा। निबटारा देखा। रिश्तों का पिछवाड़ा देखा। कुछ आंसू थे, बेखुशबू के फूल बिछे थे- पर जाते-जाते जाने वाले ने मुड़कर दोबारा देखा। कुछ

कविता वर्जीनिया को पढ़ते हुए एक अदद कमरे की ज़रूरत है एक प्याली कॉफ़ी जहां हो एक प्याली कॉफ़ी और कुछ किताबें कुछ देर का बेबाक लेटना कुछ अन्दरूनी कपड़े

कविता आती रहेंगीं बेटियां जीवन निरंतर चलता रहे ये उसूल कुदरत ने बनाया था और हमने वो उसूल तोड़ दिया। फिर कुछ यूं हुआ की हमने कुदरत को सुनना छोड़

कविताJune 19, 2018

 कविता बाप लिखवादे मियरो नाम, स्कूल में पढण कू जाउंगों। मैं करूगों कड़ी मिहनत बाप , स्कूल में फस्र्ट आउंगों।। बेकदइन बकरीन ने, मैं चराणकू नही जाउगों। दिवादे कापी किताब

कविताJune 19, 2018

कविता पंजाबी से अनुवाद : परमानंद शास्त्री वसीयत मेरी मौत पर न रोना मेरी सोच को बचाना मेरे लहू का केसर मिटटी में न मिलाना मेरी भी जिंदगी क्या बस

कविताJune 19, 2018

कविताएं पिसती है सिर्फ जनता नेता लोगों को बहलाता है नए-नए ख्वाब दिखाता है कुर्सी पर बैठते ही हम सबको आंख दिखाता है पत्रकार झूठी-सुच्ची खबरें लाता है जनता की

कविताJune 19, 2018

कविता बदबू किस ओर चला जा रहा है जीवन, निरर्थक व्यर्थ लाचार क्यों चेतना बांझ हो गई और हो गई है अपंग मस्तिष्क में कूब निकल आया है और हो

कविता चौपाये अतीत प्रतिबद्ध हैं वे कटिबद्ध हैं वे वर्तमान व भविष्य को स्वर्णिम अतीत की ओर धकेलने को चलो धकेलो-पेलो धकेलते चलो पेलते चलो राज पथ पर जन-जन को

कविता वे बरसने वाले हैं पंजाब से खबर आई है सुरजीत ने अपना ट्रेक्टर औने-पौने दामों में बेच दिया है खेती के छोटे-मोटे औजार कबाड़ी की रद्दी झोली में डाल

कविताJune 19, 2018

अच्छी लड़कियां खिड़की से झांकती लड़कियां देखती है हंसती खिलखिलाती लड़कियों को चीखती चिल्लाती लड़कियों को भीड़ के आगे चलती आंदोलन करती लड़कियों को जोर जोर आवाज़  देकर उन्हें बुलाती

कविताJune 16, 2018

राम बधाई देने आता  रहिमन संग मिठाई खाता  दोनों खड़े गली में गाएँ  आओ हम-तुम ईद मनाएँ।

हमें लिखो स्याह न हो आने वाले दिन कवि ! इन दिनों के बारे में जरूर लिखो सबको मिले न्याय और सब हो अलहादकारी भेदभाव मिटे, कवि कुछ ऐसा लिखो

कविताJune 9, 2018

अन्त मंथन ये आबो हवा बेचैन सी लगती है मुझे आज रूह हर शख्स की इस शहर में बेदम सी लगती है मुझे आज लगता है खो गया है। उसका

कविताJune 8, 2018

उत्सव हरियाणा सृजन सिद्दीक अहमद मेव एक साथ इतने हैं रंग, देख के मैं तो रह गया दंग,, कोई गा रहा दफ पर यहां, कोई बजा रहा है मृदंग, उत्सव

सबुकछ जानती है पृथ्वी... ये कैसी डरावनी परछाइयाँ कि छिप रहे हैं हम अपनी ही चालाक हँसी के पीछे तहस-नहस हो रहे हैं घोंसले डूब रही है पक्षियों की आवाज मर रहा है हवा का संगीत

कविताJune 6, 2018

खबर मिली मुझे, और मैं उत्सव में चला आया। सैनी जी ने कॉल कर, उत्सव से अवगत कराया।। सृजन से कराया अवगत, मैंने राह मेवात से पकरी। गुरु सिद्दीक मेव संग, जा पंहुचा धर्मनगरी।।

कविताJune 4, 2018

सिर पर ईंटें पीठ पर नवजात शिशु शिखर दुपहरी दो जून रोटी के लिए पसीने से तर-बतर यह मजदूरनी नहीं जानती कि किसे वोट करना है मालिक जहां बटन दबाएगा वोट हो जाएगा हमारे लोकतंत्र का यही है कड़वा सच स्रोत ः देस हरियाणा (नवम्बर-दिसम्बर, 2015), पेज- 55

ये कविताएं उन हाथों के लिए जो जंजीरों में जकड़े हैं लेकिन प्रतिरोध में उठते हैं उन पैरों के लिए जो महाजन के पास गिरवी हैं लेकिन जुलूस में शामिल

कविताMay 26, 2018

बागी लड़कियां मैं जानती हूं बहुत सारी बागी लड़कियों की पहचान यहां तक कि उनके नाम व पते भी परन्तु आपको नहीं बताउंगी, वरना हो सकता है आप उन्हें ढूंढ निकाले अपने घर के उस अन्दर वाले कमरे में जिसकी कोई खिड़की बाहर नहीं खुलती।

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