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सुनो ब्राह्मण - और सफेद हाथी मलखान सिंह की कविताएं हरियाणा सृजन उत्सव में 24 फरवरी 2018 को ‘दलित जब लिखता है’ विषय पर परिचर्चा हुई। प्रख्यात दलित कवि मलखान सिंह ने अपने अनुभवों के माध्यम से भारतीय समाज व दलित साहित्य से जुड़े ज्वलंत और विवादस्पद सवालों पर अपने विचार प्रस्तुत किए और दो कविताएं सुनाई

कविताMay 24, 2018

हरियाणा सृजन उत्सव में 23 फरवरी को राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में दामिनी यादव ने अपनी माहवारी कविता सुनाई। इस तरह की कविताओं को आमतौर पर सुनाने का रिवाज नहीं है, लेकिन दामिनी ने आधी आबादी के अनुभव को जिन संवेदनशील शब्दों में प्रस्तुत किया और जिस गंभीरता से सुनाया था 500 के करीब मौजूद श्रोता अपने साथ इस कविता को लेकर गए. कविता का टेक्सट और दामिनी की ही आवाज में कविता आपके लिएः

ये किया हमने हमने स्त्रियों की पूजा की  और लहूलुहान कर दिया हमने नदियों की पूजा की  और ज़हर घोल दिया  हमने गायों की पूजा की  और पेट में कचरा उड़ेल दिया हमने ईश्वर की पूजा की  उसके क़त्ल के लिए हमने  नायाब तरीका चुना हमने एक ईश्वर के  कई ईश्वर बनाए  और सब को आपस में लड़ा दिया ।

गजलMay 16, 2018

बात करती हैं नज़र, होंठ हमारे चुप हैं. यानि तूफ़ान तो भीतर हैं, किनारे चुप हैं. उनकी चुप्पी का तो कारण था प्रलोभन कोई और हम समझे कि वो ख़ौफ़ के मारे चुप हैं. बोलना भी है ज़रूरी साँस लेने की तरह उनको मालूम तो है, फिर भी वो सारे चुप हैं. भोर की वेला में जंगल में परिंदे लाखों है कोई खास वजह, सारे के सारे चुप हैं. जो हुआ, औरों ने औरों से किया, हमको क्या? इक यही सबको भरम जिसके सहारे चुप हैं.

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