किसको वतन कहूंगा? – संतराम उदासी

किसको वतन कहूंगा?

हर जगह लहूलुहान है धरती
हर जगह कब्रों -सी चुप पसरी
अमन कहा मैं दफऩ करूँगा
मैं अब किसको वतन कहूँगा

तोड़ डाली नानक की भुजाएं
पकड़ खींच दी शिव की जटाएं
किसको किसका दफऩ कहूँगा
मैं अब किसको वतन कहूँगा

ये जिस्म तो मेरी बेटी-सा है
ये कोई मेरी बहन के जैसी
किस -किस का मैं नग्न ढकूंगा
मैं अब किसको वतन कहूँगा

कौन करे पहचान मां-बाप
हर इक लाश दिखे एक जैसी
किस-किस के लिए कफऩ मैं लूँगा
मैं अब किसको वतन कहूँगा

लगी सिसकने चांदनी रातें
खत्म हुई दादी मां की बातें
बीते का कैसे हवन करूंगा
मैं अब किसको वतन कहूँगा

ले ज़ज्बात (संभाल) मेरे सरकार
वापिस कर मेरे गीत -प्यार
इच्छायों का कैसे दमन करूंगा
मैं अब किसको वतन कहूँगा

पंजाबी से अनुवाद : परमानंद शास्त्री,

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