Prof. Subhash Chander

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र में हिन्दी विभाग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत। जातिवाद, साम्प्रदायिकता, सामाजिक लिंगभेद के खिलाफ तथा सामाजिक सद्भभाव, साम्प्रदायिक सद्भाव, सामाजिक न्याययुक्त समाज निर्माण के लिए निरंतर सक्रिय। साहित्यिक, सांस्कृतिक व सामाजिक सवालों पर पत्र-पत्रिकाओं में लेखन।लेखन, संपादन व अनुवाद की लगभग बीस पुस्तकों का प्रकाशन प्रकाशित पुस्तकेंः साझी संस्कृति; साम्प्रदायिकता; साझी संस्कृति की विरासत; दलित मुक्ति की विरासतः संत रविदास; दलित आन्दोलनःसीमाएं और संभावनाएं; दलित आत्मकथाएंः अनुभव से चिंतन; हरियाणा की कविताःजनवादी स्वर; संपादनः जाति क्यों नहीं जाती?; आंबेडकर से दोस्तीः समता और मुक्ति; हरियणावी लोकधाराः प्रतिनिधि रागनियां; मेरी कलम सेःभगतसिंह; दस्तक 2008 व दस्तक 2009; कृष्ण और उनकी गीताः प्रतिक्रांति की दार्शनिक पुष्टि; उद्भावना पत्रिका ‘हमारा समाज और खाप पंचायतें’ विशेषांक; अनुवादः भारत में साम्प्रदायिकताः इतिहास और अनुभव; आजाद भारत में साम्प्रदायिकता और साम्प्रदायिक दंगे; हरियाणा की राजनीतिः जाति और धन का खेल; छिपने से पहले; रजनीश बेनकाब। विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों से जुड़ाव। संपादक – देस हरियाणा हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा आलोचना क्षेत्र में पुरस्कृत।

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संवाद विश्वविख्यात भाषा वैज्ञानिक, दार्शनिक, वामपंथी लेखक नोम चोम्स्की ने भाषाविज्ञान संबंधी कई क्रांतिकारी सिद्धांतों का सूत्रपात किया। भाषा और भाषा के विकास को लेकर उनका यह साक्षात्कार विज्ञान पत्रिका

खेती-बाड़ी वर्तमान में प्रचलित रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशक आधारित खेती संकट में है इसके बारे में शायद ही कोई मतभेद है। सरकारी और कृषि संस्थानों के दस्तावेज भी इस संक

आलेख भारत के राजनीतिक गठन में सैद्धांतिक स्तर पर भाषा को मुख्य आधार माना गया है, परन्तु वास्तविक रूप में ऐसा हो नहीं रहा। भाषा का शिक्षा व प्रशासन आदि

कविता मुझे मत कहना गर मैं कविता करते-करते शब्दों की जुगाली करने लगूं और सभ्य भाषा बोलते-बोलते बौराये शराबी की तरह चिल्लाने लगूं बेइखलाकी पर उतर जाऊं तुम्हारे द्वार की

कविता मैं खौफनाक चाबुकधारी नहीं कांप जाओगे जिससे। मैं पुष्प अणु हूं तुम्हारी सांसों तुम्हारे लहु में समा जाऊंगा मस्तिष्क पर बैठ करके सम्मोहित कर दूंगा मदहोश। और फिर मेरी

कविताJune 26, 2018

कविता वनों की ओर जाना ही नहीं होता बनवास जब भी अकेलापन करता है उदास ख्यालों के कुरंग नाचते हैं चुप्पी देती है ताल उल्लू चीखते हैं बिच्छू डसते हैं

कविता गली-बाजारों में/निकलती है भीड़ कभी इस ओर से कभी दूसरे छोर से हाथों में बर्छे लिए और त्रिशूल उठाए- ‘अकाल’ ‘हरहर’ महादेव के जयकारों से कांपती है हवा दानवता

कविताJune 26, 2018

कविता यह आपकी पहली जीत थी। आपने ढूंढ लिया मेरा विभीषण जैसा भाई। यह मेरी आखिरी हार थी आपने जान लिया मेरे भीतर का रहस्य। नाभि का अमृत बन गया

कविता तुमने ठीक ही कहा है- जब हम तोड़ नहीं पाते अपने इर्द-गिर्द की अदृश्य रस्सियों के अटूट जाल, तब हम दार्शनिक हो जाते हैं। कहीं एकांत में लोकगीत नहीं

विविधJune 26, 2018

पर्यावरण देहात की मनोरम छटा में चार चांद लगाने वाले जोहड़ों का अस्तित्व खतरे में है। कभी लोकजीवन की अगाध श्रद्धा व आस्था के केंद्र रहे जोहड़ आज प्रदूषण के

फवाह की मारक शक्ति समाज को छिन्न-भिन्न कर सकती है, खून की नदियां बहा सकती है, तबाही का मन्जर और ना भरने वाले जख्मों को पैदा कर सकती है।हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन  से पनपी सामाजिक दरार को पाटने के उद्देश्य से गठित किये गए सद्भावना मंच के राज्य सयोंजक के नाते मार्च और अप्रैल 2016 के राज्य भर में घूमते हुए अफवाह के खतरनाक चरित्र के व्यवहारिक पक्ष को समझने का मौका मिला। समझ में आया कि एक सामान्य घटना को अफवाह के माध्यम से अतिरंजित रूप में फैलाया जा सकता है और और जिसके  भयंकर परिणाम निकल सकते हैं।

अक्सर सार्वजनिक स्थानों, बस स्टैंड व रेलवे स्टेशनों पर भीख मांगते, होटल-ढाबों व कहीं बंधुवा मजदूर के रूप में काम करते हुए 'छोटू’ देखते हैंं। हमारी जिज्ञासु प्रवृत्ति कभी यह जानने के लिए प्रेरित नहीं हुई कि आखिर ये 'छोटू’ बने बच्चे हैं कौन? कहां से पैदा होते हैं? कभी दो कदम आगे बढ़कर उनसे दो बातचीत करने की कोशिश नहीं की।  इनके प्रति एक ही धारणा बनी हुई है कि इनके माता-पिता पैसों के लालच में जान-बूझकर ये सब करवाते हैं। लेकिन सभी का केवल यह सच नहीं होता है।

चीजों का वायदा करके इन धोखेबाजों ने सत्ता हथिया ली। लेकिन वे झूठे हैं, वे अपना वायदा पूरा नहीं करते, वे कभी नहीं करेंगे। तानाशाह खुद को आजाद कर लेते हैं, लेकिन जनता को गुलाम बना देते हैं। हम दुनिया को आजाद करने की लड़ाई लड़ें...राष्ट्रीय बाड़ों को हटा देने की लड़ाई, लोभ, नफरत व असहिष्णुता को उखाड़ फैंकने की लड़ाई! एक ऐसी दुनिया के लिए लड़ें, जहां विज्ञान और उन्नति हम सबके लिए खुशियां लेकर आए। सैनिकों, लोकतंत्र के नाम पर हम सब एक हो जाएं।

 हरियाणवी गजल यार छोड़ तकरार की बातां। आजा कर ले प्यार की बातां। एक सुपना-सा बणकै रह्गी, आपस के इतबार की बातां। आजादी म्हं भी जस की तस सैं, जबर

कहानी आज हरखू मिस्त्री सुबह-सवेरे चार बजे ही जाग नहा-धोकर, बेटे के ब्याह में समधियाने से भेंट में मिला सफेद ल_े का कुरता, पायजामा पहिन, सिर में ढेर सारा सरसों

विविधJune 24, 2018

यदि तोर डाक सुने केउ न आसे तबे एकला चलो रे, एकला चलो, एकला चलो, एकला चलो रे। यदि केउ कथा न कय, ओरे ओ अभागा यदि सबाई थाके मुख फिराये, सबाई करे भय तबे परान खुले ओरे तुई मुख फुटे तोर मनेर कथा, एकला बोलो रे !ऑ यदि सबाई फिरे जाय, ओरे ओ अभागा! […]

कविताJune 24, 2018

संस्मरण कविता उसके आसपास थी, आसपास कहीं भी नहीं थी। इस विरोधाभास की सच्चाई क्या है? घर-परिवार, वातावरण, व्यवसाय, सब कविताविहीन। कविता उसके लिए बावड़ी की तरह थी, जिसके शीतल

पिछले दशक में हरियाणा प्रेम-विवाह करने वाले नवयुवक-नवयुवतियों की उनके परिजनों द्वारा हत्या के लिए खासा बदनाम हुआ। इस तरह का माहोल बनाने में काफी बड़ी भूमिका समाज के ठेकेदारों-खाप पंचायतियों की भी रही।

सम्पादकीय के बहाने हरियाणा राज्य का पचासवां साल हैं। हरियाणा की बहुत सी उपलब्धियां हैं और विभिन्न क्षेत्रों में कई कीर्तिमान भी स्थापित किए हैं। यह साल हरियाणा के लिए

इतिहासJune 22, 2018

इतिहास के पन्नों से भारतीय स्वतंत्रता-संग्राम में 1857 व गदर-लहर दो महत्त्वपूर्ण सशस्त्र विद्रोह रहे हैं। दिलचस्प बात ये है कि दोंनों में हरियाणा क्षेत्र की उल्लेखनीय भूमिका रही है।

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