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Saturday, October 20, 2018
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Prof. Subhash Chander

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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र में हिन्दी विभाग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत। जातिवाद, साम्प्रदायिकता, सामाजिक लिंगभेद के खिलाफ तथा सामाजिक सद्भभाव, साम्प्रदायिक सद्भाव, सामाजिक न्याययुक्त समाज निर्माण के लिए निरंतर सक्रिय। साहित्यिक, सांस्कृतिक व सामाजिक सवालों पर पत्र-पत्रिकाओं में लेखन।लेखन, संपादन व अनुवाद की लगभग बीस पुस्तकों का प्रकाशन प्रकाशित पुस्तकेंः साझी संस्कृति; साम्प्रदायिकता; साझी संस्कृति की विरासत; दलित मुक्ति की विरासतः संत रविदास; दलित आन्दोलनःसीमाएं और संभावनाएं; दलित आत्मकथाएंः अनुभव से चिंतन; हरियाणा की कविताःजनवादी स्वर; संपादनः जाति क्यों नहीं जाती?; आंबेडकर से दोस्तीः समता और मुक्ति; हरियणावी लोकधाराः प्रतिनिधि रागनियां; मेरी कलम सेःभगतसिंह; दस्तक 2008 व दस्तक 2009; कृष्ण और उनकी गीताः प्रतिक्रांति की दार्शनिक पुष्टि; उद्भावना पत्रिका ‘हमारा समाज और खाप पंचायतें’ विशेषांक; अनुवादः भारत में साम्प्रदायिकताः इतिहास और अनुभव; आजाद भारत में साम्प्रदायिकता और साम्प्रदायिक दंगे; हरियाणा की राजनीतिः जाति और धन का खेल; छिपने से पहले; रजनीश बेनकाब। विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों से जुड़ाव। संपादक – देस हरियाणा हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा आलोचना क्षेत्र में पुरस्कृत।

डा. दिनेश दधीचि – एड्गर ऐलन पो की कविता का अनुवाद

एड्गर ऐलन पो (1809-1849) अनुवाद - दिनेश दधीचि सपने के भीतर इक सपना  माथे पर यह चुंबन ले लो! और, जुदाई के इस पल में इतना मुझको कह...

सरबजीत -अनश्वर

कविता कुछ भी नहीं है नश्वर मेरे सिवा कलेवर जीवित रहेगा दिसम्बर के बाद फिर-फिर इस जगत का हर निर्जीव भी अनश्वर झूठे महात्माओं ज्योतिषियों, पाखण्डियों का अनश्वर है जगत् और मेरा रोयां-रोयां नश्वर याद...

बलबीर सिंह राठी – ख़ौफ़ पैदा करने वाले यूँ तो क़िस्से...

ग़ज़ल ख़ौफ़ पैदा करने वाले यूँ तो क़िस्से भी बहुत हैं, जि़न्दगी में बे सबब हम लोग डरते भी बहुत हैं। झूठ से मरऊब होकर हम बहक...

सरबजीत – अस्पताल के पेड़

कविता ये कैंसर अस्पताल के पेड़ हैं इन पर पत्ते भी हैं इनकी टहनियां भी लंबी हैं हवा चलने पर हिलते हैं ये सब पर इनकी हरकत में हंसी...

दिनेश दधीचि – स्टीफ़न क्रेन की कविता का अनुवाद

स्टीफ़न क्रेन (1871-1900) अनुवाद - दिनेश दधीचि रेगिस्तान में मैंने देखा  रेगिस्तान में मैंने देखा प्राणी एक नग्न और वहशी घुटने मोड़े उकड़ू बैठा था ज़मीन पर, पकड़े हुए हाथ...

डॉ. दिनेश दधीचि – डब्ल्यू० एच० ऑडेन की (The Unknown Citizen)...

डब्ल्यू० एच० ऑडेन  अज्ञात नागरिक (जे० एस०/07 एम् 378 की स्मृति में संगमरमर का यह स्मारक सरकार ने बनवाया) आंकड़ों से सम्बंधित ब्यूरो के अनुसार, उसके विरुद्ध...

हरियाणा में 1857 का राष्ट्रीय विद्रोह

प्रो सूरजभान  भारत में इस वर्ष 1857 के राष्ट्रीय विद्रोह की 150वीं सालगिरह मनाई जा रही है। इस विद्रोह को देसी और विदेशी इतिहासकारों ने...

मेवाती लोक गीत -मां मेरा पीसणों, कितनो पीसो री

मेवाती लोक गीत मां मेरा पीसणों, कितनो पीसो री। जितनी दगड़ा में रेत, जणी सू कहियो री। इतनो गूंदो री, जितनी पोखर में कीच। जणी सू कहियो री... मां...

मेवाती लोक गीत – हुकम करो तो मईयां आऊं तेेरे र भवन...

मेवाती लोक गीत हुकम करो तो मईयां आऊं तेेरे र भवन में। गइया को दूध हमारे बछड़ा ने बिगाड़ो। कांई की धार चढ़ाऊ, मईया तेरे र भवन...

सुघः एक पुराने नगर की कहानी

सुघः एक पुराने नगर की कहानी ◊ प्रो. सूरजभान           यमुना नगर जिले में जगाधरी नाम का कस्बा है। जगाधरी के पूर्व में...