प्यार का पैगाम – महेंद्र  सिंह ‘फकीर’

गीत

धरती पर फैला दो, ये प्यार का पैगाम
लव तो लव है इसमें, जेहाद का क्या काम

ऐ जवानों करो बगावत
इस माहौल के खिलाफ
मानवता के दुश्मनों को
करना कभी मत माफ
भगत सिंह ने पिया था, पी लो वो ही जाम

छुरी लहराने वाले
क्यूं पा रहे सब मान
फूल खिलाने वाले
क्यूं झेल रहे अपमान
दीप जलाओ ऐसा, के ढल जाए ये शाम

झांक के देखो सीने में
धधक रही है आग
बुझा करके इन शोलों को
मत लगवाना दाग
चिंगारी है हर सीने में, ‘फकीर’ यों ही बदनाम

प्यार चीज है ऐसी
सुलझा देता हर तकरार
जितने पौधे उगते इसके
उतने कम होते हथियार
प्यार बांटने का कोई लगता नहीं है दाम

कांटे हटाने में जिनके
हाथ छलनी हो गए
वो सितारे जो चमकने
से पहले खो गए
उन सितारों को करो, तुम शाम से सलाम

स्रोतः सं. सुभाष चंद्र, देस हरियाणा (जुलाई-अगस्त 2016), पेज-49

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