साहित्य

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कविताJuly 9, 2018

 कविता शहर में कर्फ्यू है सब घरों में घुस जाएं इक ऐलान अचानक फैल जाता है। घरों में रहने वाले ओर भीतर हो जाते हैं। शहर में कर्फ्यू है सेना

कविताJuly 9, 2018

कविता जात कैसी होती है उसका रंग कैसा होता है उसकी पहचान क्या होती रूप कैसा होता है कितनी बड़ी होती दृश्य या अदृश्य गुमान, गर्व या घमण्ड या फिर

कविता स्वाहा सब कुछ स्वाहा, धर्म ग्रंथों मंत्रों, पोथी पत्रों हर कर्म क्रिया संस्कार और हर मंत्रोचारणोपरांत। स्वाह से बनती है राख! राख में क्या है भीड़ द्वारा जलाए गए

कविताJuly 9, 2018

कविता बाहुबली हर बार दिखाते हैं अपनी ताकत बताते हैं अपने मंसूबे बेकसूरों की गर्दनों पर उछल कूद करके हर बार कहते हैं मर्यादाएं मिट रही हैं संस्कृति सड़ रही

कविता बस्तियां जलातें हैं घर में कुकृत्य कर लेते हैं देवर का हक चलता है, जेठ तकता है, ससुर रौंदता है, बस्ती से लड़कियां उठा लेते हैं रेप करते हैं,

कविता बस! मजूरी मांगने की हिमाकत की थी उसने। एक एक कर सामान फैंका गया बाहर! नन्हें हाथों के खिलौने, टूटा हुआ चुल्हा, तवा-परात, लोहे का चिमटा, तांसला मैले कुचैले

कविताJuly 9, 2018

कविता ये लाशें जो जमीन पर अस्त व्यस्त पडी हैं कुछ क्षण पहले ये हंस खेल रहे थे मारने से पहले इन्हें, घर से बुलाया गया था ये मां जो

हरियाणवी ग़ज़ल बाळक हो गए स्याणे घर मैं। झगड़े नवे पुराणे घर मैं। आए नवे जमाने घर मैं। ख्याल लगे टकराणे घर मैं। मैं जिन तईं समझाया करता। लागे वैं

कविताJuly 9, 2018

कविता   हमारा हरियाणा बडा प्यारा है जगत जहां से न्यारा है यहां के लोग बड़े कमाऊ हैं सीधे हैं, सच्चे हैं बहादुरी तो बस, एकदम कमाल की है संस्कृति

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