नमस्ते – अनुराधा बेनीवाल
कविता नमस्ते भतेरा ढो लिया तेरी कल्चर का बोझ, इब चलाइए ट्रैक्टर रोज। आधी धरती आधा घर, पूरी पढ़ाई, बणु अफसर। देखणी मैंने दुनिया सारी, छोड़ दी या सरम की बीमारी। ब्याह की भी मर्जी, तलाक की भी। मेरी जिंदगी मेरी जिम्मेवारी, करूंगी मैं सारी तैयारी। राज़ी रहण का मैंने हक सै, जियूंगी अपणी शर्तां […]
रास्सा – अनुराधा बेनीवाल
कविता कंठी ना चाहंदी, खेत चहिये तीळ ना चाहंदी, रेत चहिये घर भी मैं आपे बणा ल्यूंगी माँ-बाबू तेरा हेज चहिये। दूस्सर नहीं, मेरी किताब जोड़ ले कॉलेज यूनिवर्सिटी में पढ़े का सारा हिसाब जोड़ ले। एक-एक किस्त मैं आप पुगा दूंगी, तू बोझ मन्ने एकबे कहणा छोड़ दे। मेरे पैदा होए पे आह ना […]
मैंने देखी एक लड़की – अनुराधा बेनीवाल
कविता मैंने देखी एक लड़की आज मैंने एक लड़की देखी नदी किनारे पगडंडी पे इठलाती कान में ईयरफोन लगाए, संगीत पे लहराती लड़की देखी आज मैंने एक लड़की देखी। मेरे पीछे चलने से बेख़बर आगे से आते नौजवानों से ना-घबराती मचलती इठलाती मस्त हवा में जम्प लगाती लड़की देखी आज मैंने एक लड़की देखी। बीच-बीच […]
आजादी मेरा ब्रांड -अनुराधा बेनीवाल
संवाद 7 अप्रैल 2016 को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में ‘देस हरियाणा’ पत्रिका के तत्वाधान में ‘अपने लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम हुआ, जिसमें ‘आजादी मेरा ब्रांड’ की लेखिका अनुराधा बेनीवाल ने भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने अपने अनुभव सांझा किए तथा उपस्थित लोगों के सवालों पर अपना दृष्टिकोण रखा। इस अवसर पर लगभग 180 लोग […]