साखी – मन मंदिर दिल द्वारखा, काया काशी जान।
दस द्वारे का पिंजरा, याहि2 में ज्योत पहचान।। टेक

तन काया का मंदिर साधु भाई, काया राम का मंदिर।
इना मंदिर की शोभा पियारी, शोभा अजब है सुंदर।।
चरण – पांच तीन मिल बना है मंदिर, कारीगर घड़ा-घड़ंतर।
नौ दर3 खुल्ले दसवां बंद कर, कुदरत कला कलन्दर।।
इना मंदिर में उन्मुख4 कुवला5 , वहां है सात समुन्दर।
जो कोई अमृत पिवे कुवे का, वाका भाग बुलन्दर।।
अनहद घण्टा बाजे मंदिर में, चढ़ देखो तुम अन्दर।
अखण्ड रोशनी होय दिन राती, जैसे रोशनी चन्दर।।
बैठे साहेब मन्दिर में, ध्यान धरो उनके अन्दर।
कहे कबीर साहब करो नेम से पूजा, जब दरसेगा6 घट अन्दर।।

  1. इसी में 3. द्वार 4. उल्टा 5. कुआं (खोपड़ी) (विचारधारा) 6. मिल जाएगा

Leave a reply

Search
Loading

Signing-in 3 seconds...

Signing-up 3 seconds...

RETURNING FOR ANOTHER TRIP?