
साखी – पंडित और मशालची1, दोनों को सूझे नाहि।
औरन को करे चांदनी, आप अंधेरा मांई।।टेक
पंडित तुम कैसे उत्तम कहाये।
चरण – एक जाइनि2 से चार बरन3 भे, हाड़ मास जीव गूदा।
सुत परि दूजे नाम धराये, वाको करम न छूटा।।
कन्या जाति जाति की बेचत6 , कौने जाति कहाये।
आप कन्या बेचन लागे, भारी दाम चढ़ाय।।
जहं लगि पाप अहै दुनिया में, सो सब कांध चढ़ाये।
कहै कबीर सुनो हो पंडित, घर चौरासी या छाय।।