
साखी – पूरब दिशा हरी को बासा, पश्चिम अल्लह मुकामा।
दिल में खोजि दिलहि मा खोजे, इहै करीमा रामा।।टेक –
म्हारो हीरो हेराणो कचरा में,
पांच पचीस का झगड़न में।
चरण – कोई पूरब कोई पश्चिम ढूंढे हो।
कोई पानी कोई पथरों में।।
कोई तीरथ कोई बरत करत हो।
कोई माला की जपरन में।।
सुनीजन मुनीजन पीर औल्या हो।
भूली गया सब नखरन में।।
धर्मदास के हीरा पाया हो।
बांद लिया है हंसलन2 में।।