देस हरियाणा3- Page

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साखी – पंडित और मशालची1, दोनों को सूझे नाहि। औरन को करे चांदनी, आप अंधेरा मांई।।टेक पंडित तुम कैसे उत्तम कहाये। चरण – एक जाइनि2 से चार बरन3 भे, हाड़

साखी – कांकर पाथर जोरि1 कै, मस्जिद लई बनाय। तां  चढ़ी मुल्ला बांग2 दे, बहरो भयो खुदाय।।टेक न जाने तेरा साहेब कैसा है। चरण – मस्जिद भीतर मुल्ला पुकारै, क्या

कविताJune 28, 2018

साखी – पूरब दिशा हरी को बासा, पश्चिम अल्लह मुकामा। दिल में खोजि दिलहि मा खोजे, इहै करीमा रामा।।टेक – म्हारो हीरो हेराणो कचरा में, पांच पचीस का झगड़न में।

साखी – बैस्नों भया तो क्या भया, बूझा नहीं विवेक। छापा तिलक बनाई करि, दुविधा लोक अनेक।। टेक – पंडित छाण पियो जल पाणी, तेरी काया कहां बिटलाणी1। चरण –

साखी – कस्तूरी कुण्डली बसे, मृग ढूंढे वन माहि। जैसे राम घट-घट बसे, दुनिया जाने नाही।। जा बसे निरंजन राय, बैकुण्ठ कहां मेरे भाई। चरण – कितना ऊंचा कितना नीचा

साखी – हिन्दू के दया नहीं, मेहर1 तुरक के नाहीं। कहे कबीर दोनों गए, लख2  चौरासी माही।टेक मुल्ला कहो किताब की बातें। चरण – जिस बकरी का दूध पिया, हो

साखी – सेख सबूरी बाहिरा, क्या हज काबै जाई। जाकि दिल साबित2 , वाकौ3 कहां खुदाय। टेक बेराग कठे है मेरा भाई, सब जग बंधिया4 भरम के माही। चरण –

घट-घट में रामजी बोले साखी -एक समाना सकल में, सकल समाना ताहि1। कबीर समाना मुझ2 में, वहां दूसरा नाहि।।टेक घट-घट में रामजी बोले री, परगट3 पीयाजी बोले री, मंदिर में

कविताJune 28, 2018

संगत  साधु की, नित2 प्रीत कजे जाय। दुर्मति दूर बहावसि3, देखी सूरत जगाय।।टेक – कोई सफा न देखा दिल काचरण – बिल्ली देखी बगला देखा, सर्प जो देखा बिल का।

साखी – हिरदा भीतर आरती2, मुख देखा नहीं जाय। मुख तो तबहि देखहि, जो दिल की दुविधा जाय।।टेक भाई रे दुइ जगदीश कहां ते आया, कहुं कौनें भरमाया। चरण –

साखी -ऐसी मति संसार की, ज्यों गाडर1 का ठाठ2। एक पड़ा जेहि गाड़3 में, सबै जाहि तेहि बाट।।टेक -क्यों भूलीगी थारो देस दीवानी क्यों भूलीगी थारो देस हो-चरण -भूली मालन4

साखी – एकै त्वचा हाड़ मूल मूत्रा, एक रुधिर एक गूदा। एक बूंद से सृष्टि रची है, को ब्राह्मण को शुद्रा।।टेक साधौ, पांडे निपुन कसाई। चरण – बकरी मारि भेड़ी

संवाद विश्वविख्यात भाषा वैज्ञानिक, दार्शनिक, वामपंथी लेखक नोम चोम्स्की ने भाषाविज्ञान संबंधी कई क्रांतिकारी सिद्धांतों का सूत्रपात किया। भाषा और भाषा के विकास को लेकर उनका यह साक्षात्कार विज्ञान पत्रिका

खेती-बाड़ी वर्तमान में प्रचलित रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशक आधारित खेती संकट में है इसके बारे में शायद ही कोई मतभेद है। सरकारी और कृषि संस्थानों के दस्तावेज भी इस संक

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