देस हरियाणा3- Page

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कविताJune 28, 2018

साखी – कहंता1 तो बहुत मिला, गहंता2 मिला न कोय। सो कहंता बहि जान दे, जो न गहंता होय।।टेक अमल करे सो पाई रे साधो भाई अमल करे सो पाई।

साखी – पूरब दिशा हरी को बासा, पश्चिम अल्लह मुकामा। दिल में खोजि दिलहि मा खोजे, इहै करीमा रामा।।टेक – म्हारो हीरो हेराणो कचरा में, पांच पचीस का झगड़न में।

साखी – कस्तूरी कुण्डली बसे, मृग ढूंढे वन माहि। जैसे राम घट-घट बसे, दुनिया जाने नाही।। जा बसे निरंजन राय, बैकुण्ठ कहां मेरे भाई। चरण – कितना ऊंचा कितना नीचा

साखी – हिन्दू के दया नहीं, मेहर1 तुरक के नाहीं। कहे कबीर दोनों गए, लख2  चौरासी माही।टेक मुल्ला कहो किताब की बातें। चरण – जिस बकरी का दूध पिया, हो

साखी – पाथर पूजत हरि मिले, तो मैं पूजु पहाड़। वा से तो चाकी भली, पीस खाये संसार।।टेक धातु की धेनु दूध नही देती रे बीरा म्हारा, धातु की धेनु

साखी – सेख सबूरी बाहिरा, क्या हज काबै जाई। जाकि दिल साबित2 , वाकौ3 कहां खुदाय। टेक बेराग कठे है मेरा भाई, सब जग बंधिया4 भरम के माही। चरण –

घट-घट में रामजी बोले साखी -एक समाना सकल में, सकल समाना ताहि1। कबीर समाना मुझ2 में, वहां दूसरा नाहि।।टेक घट-घट में रामजी बोले री, परगट3 पीयाजी बोले री, मंदिर में

साखी – सिद्ध भया तो क्या भया, चहु दिस1 फूटी बास2। अंदर वाके  बीज है, फिर उगन की आस3। टेक जोगी मन नी रंगाया, रंगाया कपड़ा। पाणी में न्हाई-न्हाई पूजा फतरा4,

संगत  साधु की, नित2 प्रीत कजे जाय। दुर्मति दूर बहावसि3, देखी सूरत जगाय।।टेक – कोई सफा न देखा दिल काचरण – बिल्ली देखी बगला देखा, सर्प जो देखा बिल का।

साखी – हिरदा भीतर आरती2, मुख देखा नहीं जाय। मुख तो तबहि देखहि, जो दिल की दुविधा जाय।।टेक भाई रे दुइ जगदीश कहां ते आया, कहुं कौनें भरमाया। चरण –

साखी -ऐसी मति संसार की, ज्यों गाडर1 का ठाठ2। एक पड़ा जेहि गाड़3 में, सबै जाहि तेहि बाट।।टेक -क्यों भूलीगी थारो देस दीवानी क्यों भूलीगी थारो देस हो-चरण -भूली मालन4

कविताJune 28, 2018

साखी – सात दीप नौ खण्ड में, सतगुरु फेंकी डोर। हंसा डोरी न चढ़े, तो क्या सतगुुरु का जोर।। टेक तेरा मेरा मनुवा कैसे एक होई रे। चरण – मैं

संवाद विश्वविख्यात भाषा वैज्ञानिक, दार्शनिक, वामपंथी लेखक नोम चोम्स्की ने भाषाविज्ञान संबंधी कई क्रांतिकारी सिद्धांतों का सूत्रपात किया। भाषा और भाषा के विकास को लेकर उनका यह साक्षात्कार विज्ञान पत्रिका

खेती-बाड़ी वर्तमान में प्रचलित रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशक आधारित खेती संकट में है इसके बारे में शायद ही कोई मतभेद है। सरकारी और कृषि संस्थानों के दस्तावेज भी इस संक

आलेख भारत के राजनीतिक गठन में सैद्धांतिक स्तर पर भाषा को मुख्य आधार माना गया है, परन्तु वास्तविक रूप में ऐसा हो नहीं रहा। भाषा का शिक्षा व प्रशासन आदि

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