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Soldiers marching with rifles and flag beside historic fort at sunset

इतिहासApril 27, 2026

प्रो सूरजभान  भारत में इस वर्ष 1857 के राष्ट्रीय विद्रोह की 150वीं सालगिरह मनाई जा रही है। इस विद्रोह को देसी और विदेशी इतिहासकारों ने अपनी – अपनी दृष्टियों से

स्मृति शेष मास्टर सतबीर द्वारा गाए सांग व किस्से भगत सिंह,  सुभाष चन्द्र बोस, उधम सिंह, अंजना पवन, नल दमयन्ती, वीजा सोरठ, चापसिंह, जयमल फत्ता, पिंगला भरथरी, जानी चोर, शाही

आलेख हमारा प्रदेश कृषि प्रधान है। प्रदेश की जनसंख्या का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा कृषि के कार्य में संलग्न है। यहां के निवासियों की आजीविका का मुख्य साधन कृषि होने

इतिहासJuly 8, 2018

इतिहास ◊ प्रो सूरजभान सतनामी सम्प्रदाय में जाट, चमार, खाती आदि छोटी जातियों के लोग शामिल थे। परन्तु उन्होंने अपने जातिगत भेद मिटा दिए थे। वे सादा भोजन करते और

सुरेन्द्र पाल सिंह – आज देश में कृषि के संकट की चर्चा हो रही है। आप इसे कैसे परिभाषित करते हैं? इस संकट के क्या कारक हैं? योगेन्द्र यादव –

सिनेमा माध्यम भारत में अपने सौ साल पूरे कर चुका है। सिनेमा ने भारतीय समाज को गहरे से प्रभावित किया है। बदलते हुए समाज को भी सिनेमा में देखा जा

लोक कथा                 एक चिड़िया थी अर एक था कौआ। वै दोनों प्यार प्रेम तै रह्या करै थे। एक दिन कौआ चिड़िया तै कहण लाग्या अक् चिड़िया हम दोनों दाणे-दाणे

आलेख अर्थशास्त्री, राजनेता, मंत्री लेखक, संविधान निर्माता  आदि सभी रूपों और परिस्थितियों में डा.आम्बेडकर ने किसान हित की अनदेखी नहीं की। वे समय-समय पर सभी रूपों में किसानों के कल्याण

सामाजिक न्याय अपने निर्माण के पचास वर्षों के दौरान हरियाणा राज्य का तीव्र आर्थिक विकास हुआ है। विकास के माप हेतु निर्मित सूचकांक के विभिन्न सूचकों को इस राज्य के

महिला जब हम छोटे थे तो हमारी दादी-मांओं, चाची-ताइयों से सुना करते थे कि जब आजादी का आंदोलन जारी था तो वो ये गीत बड़े ही चाव से गाया करती

सामाजिक न्याय हरियाणा इस वर्ष अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा है। ये 50 साल हर क्षेत्र में हुए बदलावों के गवाह हैं। हरित क्रांति के प्रभावों से कृषि पैदावार में

सेहत भारत में  1980-90 के दशकों तक ‘हस्पताल’ सुविधा ज्यादातर सरकारी या पब्लिक क्षेत्र में थी। आर्थिक उदारीकरण के बाद ढांचागत परिवर्तन से सरकारों ने निजी संस्थाओं के लिए सस्ती

मेरे पांव लडख़ड़ाते हैं लेकिन मेरे हौसलों को कभी लडख़ड़ाने नहीं दिया क्योंकि मुझे बहुत आगे तक जाना है इन्हीं पांवों से चलकर और बस आगे बढ़ते जाना है।’   

इतिहास हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में यमुना नदी के किनारे एक शहर की स्थापना दसवें पातशाह साहिब श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी द्वारा हुई थी। इस शहर को पांवटा

अफ्रीकी कहानी उनका कहना है कि मेरा जन्म घाना के मध्यभाग में स्थित एक बड़े गांव हसोडजी में हुआ। वे ऐसा भी कहते हैं कि जब सारा अफ्रीका सूखा-ग्रस्त था,

आलेख सदानंद साही समय आ गया है कि हम भाषा के सवाल को गंभीरता से लें। भाषा मनुष्य होने की शर्त है। इसे सिर्फ अभिव्यक्ति, संपन्न और दरिद्र जैसे पैमाने

साखी – दौड़त-दौड़त दौड़िया, जहां तक मन की दौड़ दौड़ थका मन थिर2 हुआ, तो वस्तु ठौर की ठौर।।टेक – मौको कहां ढूंढे रे बन्दे, मैं तो तेरे पास। चरण

खेती-बाड़ी वर्तमान में प्रचलित रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशक आधारित खेती संकट में है इसके बारे में शायद ही कोई मतभेद है। सरकारी और कृषि संस्थानों के दस्तावेज भी इस संक

पर्यावरण देहात की मनोरम छटा में चार चांद लगाने वाले जोहड़ों का अस्तित्व खतरे में है। कभी लोकजीवन की अगाध श्रद्धा व आस्था के केंद्र रहे जोहड़ आज प्रदूषण के

विविधJune 26, 2018

फवाह की मारक शक्ति समाज को छिन्न-भिन्न कर सकती है, खून की नदियां बहा सकती है, तबाही का मन्जर और ना भरने वाले जख्मों को पैदा कर सकती है।हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन  से पनपी सामाजिक दरार को पाटने के उद्देश्य से गठित किये गए सद्भावना मंच के राज्य सयोंजक के नाते मार्च और अप्रैल 2016 के राज्य भर में घूमते हुए अफवाह के खतरनाक चरित्र के व्यवहारिक पक्ष को समझने का मौका मिला। समझ में आया कि एक सामान्य घटना को अफवाह के माध्यम से अतिरंजित रूप में फैलाया जा सकता है और और जिसके  भयंकर परिणाम निकल सकते हैं।

अक्सर सार्वजनिक स्थानों, बस स्टैंड व रेलवे स्टेशनों पर भीख मांगते, होटल-ढाबों व कहीं बंधुवा मजदूर के रूप में काम करते हुए 'छोटू’ देखते हैंं। हमारी जिज्ञासु प्रवृत्ति कभी यह जानने के लिए प्रेरित नहीं हुई कि आखिर ये 'छोटू’ बने बच्चे हैं कौन? कहां से पैदा होते हैं? कभी दो कदम आगे बढ़कर उनसे दो बातचीत करने की कोशिश नहीं की।  इनके प्रति एक ही धारणा बनी हुई है कि इनके माता-पिता पैसों के लालच में जान-बूझकर ये सब करवाते हैं। लेकिन सभी का केवल यह सच नहीं होता है।

चीजों का वायदा करके इन धोखेबाजों ने सत्ता हथिया ली। लेकिन वे झूठे हैं, वे अपना वायदा पूरा नहीं करते, वे कभी नहीं करेंगे। तानाशाह खुद को आजाद कर लेते हैं, लेकिन जनता को गुलाम बना देते हैं। हम दुनिया को आजाद करने की लड़ाई लड़ें...राष्ट्रीय बाड़ों को हटा देने की लड़ाई, लोभ, नफरत व असहिष्णुता को उखाड़ फैंकने की लड़ाई! एक ऐसी दुनिया के लिए लड़ें, जहां विज्ञान और उन्नति हम सबके लिए खुशियां लेकर आए। सैनिकों, लोकतंत्र के नाम पर हम सब एक हो जाएं।

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