All posts tagged in women

10Articles

सामयिकJuly 10, 2018

आलेख हमारा प्रदेश कृषि प्रधान है। प्रदेश की जनसंख्या का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा कृषि के कार्य में संलग्न है। यहां के निवासियों की आजीविका का मुख्य साधन कृषि होने

सामाजिक न्याय अपने निर्माण के पचास वर्षों के दौरान हरियाणा राज्य का तीव्र आर्थिक विकास हुआ है। विकास के माप हेतु निर्मित सूचकांक के विभिन्न सूचकों को इस राज्य के

9 मई 2016 को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में ‘देस हरियाणा’ पत्रिका की ओर से लेखक से मिलिए कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लेखक सोना चौधरी से छात्रों, शोधार्थियों तथा शिक्षकों

कहानीJune 20, 2018

कहानी कहने को दिल्ली, पर दिल्ली-हरियाणा बार्डर से सटा गांव। बोली, बाना, रिवाज और लोग सब हरियाणवी। हल्की गर्मियों की सांझ चार बजे का समय है। मोहल्ले में सब अपने

संवाद 7 अप्रैल 2016 को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में ‘देस हरियाणा’ पत्रिका के तत्वाधान में ‘अपने लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम हुआ, जिसमें ‘आजादी मेरा ब्रांड’ की लेखिका अनुराधा बेनीवाल ने

संवाद 7 अप्रैल 2016 को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में ‘देस हरियाणा’ पत्रिका के तत्वाधान में ‘अपने लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम हुआ, जिसमें ‘आजादी मेरा ब्रांड’ की लेखिका अनुराधा बेनीवाल ने

अनुराधा हरियाणा सृजन उत्सव के दौरान 25 फरवरी 2018 को ‘स्त्री सृजन संकल्पः उपलब्धियाँ और अनुभव’ विषय पर परिचर्चा हुई। युवा कवियत्री विपिन चौधरी, नाटक कलाकार व शिक्षाविद कमला, शोधार्थी

कविताJune 7, 2018

सबुकछ जानती है पृथ्वी... ये कैसी डरावनी परछाइयाँ कि छिप रहे हैं हम अपनी ही चालाक हँसी के पीछे तहस-नहस हो रहे हैं घोंसले डूब रही है पक्षियों की आवाज मर रहा है हवा का संगीत

कभी दरों से कभी खिड़कियों से बोलेंगे सड़क पे रोकोगे तो हम घरों से बोलेंगे कटी  ज़बाँ  तो   इशारे  करेंगे  आँखों  से जो सर कटे तो हम अपनी धड़ों से बोलेंगे भारतीय समाज की विडंबना ही है कि अत्यधिक तकनीकी युग में भी शासन-सत्ताओं के लिए जन-आक्रोश की दिशा भ्रमित करने के लिए साम्प्रदायिकता तुरप का पत्ता साबित हो रहा है। शासन-सत्ताएं साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण करने का हर हथकण्डा अपना रही हैं। गुड़गांव में नमाज अता करते लोगों पर हमला करना, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 80 साल से दीवार पर टंगे मोहम्मद अली जिन्ना के चित्र पर बवाल काटना साम्प्रदायिक विभाजन की परियोजना के अंग ही तो हैं। सामूहिक चेतना का साम्प्रदायिकरण भारतीय समाज के बहुलतावादी ढांचे, सामाजिक शांति, साम्प्रदायिक भाईचारे और आपसी विश्वास को बरबाद कर देगा। सांस्कृतिक-धार्मिक बहुलता व विविधता भारतीय समाज का गहना है।

कविताMay 24, 2018

हरियाणा सृजन उत्सव में 23 फरवरी को राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में दामिनी यादव ने अपनी माहवारी कविता सुनाई। इस तरह की कविताओं को आमतौर पर सुनाने का रिवाज नहीं है, लेकिन दामिनी ने आधी आबादी के अनुभव को जिन संवेदनशील शब्दों में प्रस्तुत किया और जिस गंभीरता से सुनाया था 500 के करीब मौजूद श्रोता अपने साथ इस कविता को लेकर गए. कविता का टेक्सट और दामिनी की ही आवाज में कविता आपके लिएः

Search
Loading

Signing-in 3 seconds...

Signing-up 3 seconds...

RETURNING FOR ANOTHER TRIP?