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हमें लिखो स्याह न हो आने वाले दिन कवि ! इन दिनों के बारे में जरूर लिखो सबको मिले न्याय और सब हो अलहादकारी भेदभाव मिटे, कवि कुछ ऐसा लिखो

कविताJune 8, 2018

उत्सव हरियाणा सृजन सिद्दीक अहमद मेव एक साथ इतने हैं रंग, देख के मैं तो रह गया दंग,, कोई गा रहा दफ पर यहां, कोई बजा रहा है मृदंग, उत्सव

कविताJune 7, 2018

सबुकछ जानती है पृथ्वी... ये कैसी डरावनी परछाइयाँ कि छिप रहे हैं हम अपनी ही चालाक हँसी के पीछे तहस-नहस हो रहे हैं घोंसले डूब रही है पक्षियों की आवाज मर रहा है हवा का संगीत

करनाल जिले केसिधपुर गांव में साधारण दुकानदार के घर 9 मई 1951 को जन्म। थानेसर से जे.बी.टी. की। हरियाणा शिक्षा विभाग में शिक्षक रहे। साक्षारता अभियान में सक्रिय भागीदारी। सेवानिवृति के बाद साहित्यिक कार्य में व्यस्त। च्यौंद कसूती (रागनी संग्रह), डंगवारा (रागनी संग्रह), दंगे पागल होते हैं (कविता संग्रह), त्रिवेणी(दोहे, कुण्डलियां, हरियाणवी गजल) रचनाएं प्रकाशित।

धर्मेन्द्र कंवारी की हरियाणवी कविता मोल की लुगाई रामफळ गेल या कै मुसीबत आई किल्ले तीन अर घरां चार भाई मां खाट म्ह पड़ी रोज सिसकै मन्नै बहू ल्यादौ, मन्नै आग्गा दिक्खै

बागी लड़कियां मैं जानती हूं बहुत सारी बागी लड़कियों की पहचान यहां तक कि उनके नाम व पते भी परन्तु आपको नहीं बताउंगी, वरना हो सकता है आप उन्हें ढूंढ निकाले अपने घर के उस अन्दर वाले कमरे में जिसकी कोई खिड़की बाहर नहीं खुलती।

सुनो ब्राह्मण - और सफेद हाथी मलखान सिंह की कविताएं हरियाणा सृजन उत्सव में 24 फरवरी 2018 को ‘दलित जब लिखता है’ विषय पर परिचर्चा हुई। प्रख्यात दलित कवि मलखान सिंह ने अपने अनुभवों के माध्यम से भारतीय समाज व दलित साहित्य से जुड़े ज्वलंत और विवादस्पद सवालों पर अपने विचार प्रस्तुत किए और दो कविताएं सुनाई

हरियाणा सृजन उत्सव में 23 फरवरी को राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में दामिनी यादव ने अपनी माहवारी कविता सुनाई। इस तरह की कविताओं को आमतौर पर सुनाने का रिवाज नहीं है, लेकिन दामिनी ने आधी आबादी के अनुभव को जिन संवेदनशील शब्दों में प्रस्तुत किया और जिस गंभीरता से सुनाया था 500 के करीब मौजूद श्रोता अपने साथ इस कविता को लेकर गए. कविता का टेक्सट और दामिनी की ही आवाज में कविता आपके लिएः

 गतिविधियां कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के सभागार में देस हरियाणा की तरफ वरिष्ठ कवि ओम प्रकाश करुणेश के हाल ही में प्रकाशित हुए काव्य संग्रह ‘बुत गूंगे नहीं

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