सबुकछ जानती है पृथ्वी... ये कैसी डरावनी परछाइयाँ कि छिप रहे हैं हम अपनी ही चालाक हँसी के पीछे तहस-नहस हो रहे हैं घोंसले डूब रही है पक्षियों की आवाज मर रहा है हवा का संगीत
सबुकछ जानती है पृथ्वी... ये कैसी डरावनी परछाइयाँ कि छिप रहे हैं हम अपनी ही चालाक हँसी के पीछे तहस-नहस हो रहे हैं घोंसले डूब रही है पक्षियों की आवाज मर रहा है हवा का संगीत
खबर मिली मुझे, और मैं उत्सव में चला आया। सैनी जी ने कॉल कर, उत्सव से अवगत कराया।। सृजन से कराया अवगत, मैंने राह मेवात से पकरी। गुरु सिद्दीक मेव संग, जा पंहुचा धर्मनगरी।।
दस-दस कोस सफर काटते मोटर ठेल्या का टोटा था। रेहङू पै खेता म्है जाणा, राबड़ी का ठंडा कलेवा था।
सिर पर ईंटें पीठ पर नवजात शिशु शिखर दुपहरी दो जून रोटी के लिए पसीने से तर-बतर यह मजदूरनी नहीं जानती कि किसे वोट करना है मालिक जहां बटन दबाएगा वोट हो जाएगा हमारे लोकतंत्र का यही है कड़वा सच स्रोत ः देस हरियाणा (नवम्बर-दिसम्बर, 2015), पेज- 55
औपनिवेशक दासता का ज्ञान-काण्ड कृष्ण कुमार भारत लगभग दो सौ साल तक अग्रेंजी साम्राज्य के अधीन रहा। साम्राज्यवाद ने भारत के प्राकृतिक-भौतिक संसाधनों का केवल दोहन ही नहीं किया, बल्कि
मेवाती लोक जीवन की मिठास इत दिल्ली उत आगरा मथुरा सू बैराठ। काला पहाड़ की शाळ में बसै मेरी मेवात।। इस मेवाती दोहे में मेवात का भौगोलिक फैलाव
इतिहास के पन्नों से… मोरनी: एक ऐतिहासिक झलक शिवालिक की पहाड़ियों में स्थित मोरनी नामक एक छोटे से कस्बे की सबसे ऊंची पहाड़ी पर एक किले की इमारत है,
लघु-कथा धर्म-धंधा मोहल्ले का मंदिर एक अर्से से अर्द्धनिर्माण पड़ा हुआ था। दीवारें बन चुकी थीं, छत की दरकार थी। मूर्तियां प्राण-प्रतिष्ठित थीं, अतः श्रद्धालुओं की आवाजाही अनवरत जारी
लघु कथा जकड़न अगले दिन उन्होंने शापिंग मॉल का रुख किया। वहां वे हबड़-तबड में सामान देखते रहे। इस बार वे काफी पैसे लेकर गए थे। पत्नी की निगाहें
संस्मरण मैं जब जाट हाई स्कूल की प्रथम कक्षा में दाखिल हुआ, उस समय 10-11 वर्ष का था। स्कूल जींद के रेलवे स्टेशन से पूर्व की ओर आधा-पौना कोस पर
शिक्षा सांस्कृतिक प्रक्रिया है, समाजीकरण का माध्यम, शक्ति का स्रोत और शोषण से मुक्ति का मार्ग है। शिक्षा का व्यक्ति और समाज के विकास से गहरा रिश्ता है, विशेषकर आज की ज्ञान केन्द्रित व नियन्त्रित दौर में। समाज के विकास और बदलाव के साथ साथ शिक्षा व ज्ञान का चरित्र भी बदला है। शिक्षा-विमर्श के मुद्दे भी बदले हैं।
डा. सुभाष चन्द्र धर्मनिरपेक्षता धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है कि राज्य के मामलों में, राजनीति के मामलों में और अन्य गैर-धार्मिक मामलों से धर्म को दूर रखा जाए और सरकारें-प्रशासन धर्म
ये कविताएं उन हाथों के लिए जो जंजीरों में जकड़े हैं लेकिन प्रतिरोध में उठते हैं उन पैरों के लिए जो महाजन के पास गिरवी हैं लेकिन जुलूस में शामिल
रामफल सिंह जख्मी जिला हिसार के गंगणखेड़ी गांव में 17 अक्तूबर, 1954 को जन्म। ज्ञान। औपचारिक शिक्षा नहीं मिली। साक्षरता अभियान के दौरान अक्षरज्ञान प्राप्त किया। रागनी, गीत गायन-लेखन में
रामकिशन व्यास 11 अक्टूबर 1925 में जन्म हुआ। माईराम अलेवा के शिष्य। 1941 में सांग पार्टी बनाई। बीस सांगों तथा मुक्तक रागनियों और भजनों की रचना की। तालाब, स्कूल, चौपाल
हबीब भारती सी बी सिंह श्योराण उर्फ हबीब भारती का जन्म भिवानी जिले के मंढौली गांव में हुआ। पंजाब इंजीनियरिंग कालेज, चण्डीगढ से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक। सन् 1978 से
सत्यवीर ‘नाहड़िया’ रेवाड़ी जिले के नाहड़ गांव में 15 फरवरी 1971 को जन्म। एम.एससी., बी.एड. की उपाधि। लोक राग नामक हरियाणवी रागनी-संग्रह प्रकाशित चंडीगढ़ से दैनिक ट्रिब्यून में ‘बोल बखत
मुनिश्वर देव जिला करनाल के गांव सीधपुर में श्री हिरदाराम और श्रीमती माया देवी के घर सन् 1920 में जन्म। नाम मन्साराम। समस्त जीवन मजदूर किसान को जागृत करने के
राजेश दलाल रोहतक जिला के चिड़ी गांव में जन्म। स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की। बचपन से रागनी तथा गीत गाने का शौक। ज्ञान-विज्ञान आन्दोलन से जनवादी एवं प्रगतिशील लेखन की
पंडित कृष्ण चन्द रोहतक जिले के सिसाना गांव में 22 जुलाई, 1922 को साधारण किसान परिवार में जन्म। 10वीं तक औपचारिक शिक्षा। 1940 में फौज में भरती। बाद में दिल्ली
मुकेश यादव संतोष कुमारी उर्फ मुकेश यादव का जन्म झज्जर जिले के सिसरौली गांव में 2 जून, 1967 को। साक्षरता अभियान तथा सामाजिक-परिवर्तन के कार्यों में सक्रिय भागीदारी। महत्वपूर्ण पत्रिकाओं