desharyanaकविता, देस हरियाणाJune 20, 2018
कविता
लिखना केवल लिखने तक न रह जाये सीमित सोच, सकपकाता है ये मन
कहना सिर्फ कहने तक न रह जाए निमित सोच, कचकचाता है ये मन
सोचना सिर्फ सोचने पर न रह जाये आलम्बित सोच, घबराता है ये मन
स्रोतः सं. सुभाष चंद्र, देस हरियाणा (जुलाई-अगस्त 2016) पेज-29
इतिहासApril 27, 2026
देस हरियाणाApril 27, 2026
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