मंगतराम शास्त्री की ग़ज़ल

मंगतराम शास्त्री

औरां कै सिर लाणा सीख, अपणा खोट छुपाणा सीख।
खोट कर्या पछतावै ना, मंद-मंद मुस्काणा सीख।

हाथ काम कै ला ना ला, बस फोए से लाणा सीख।
बाबा बण कै मौज उड़ा, बस थोड़ा बहकाणा सीख।

खूब दवाई बिक ज्यांगी, थोड़ा पेट घुमाणा सीख।
राजनीति के झगड़े नै, जात धरम पै ल्याणा सीख।

हवा भतेरी चाल्लै सै, आग पूळे म्हं लाणा सीख।
दिन म्हं सुथरे भाषण दे, रात नै पाड़ लगाणा सीख।

किसका कौण बिगाड़ै के, शरम तार गिरकाणां सीख।
दे कै गाळ पड़ौसी नै, देशभगत कहलाणा सीख।

कत्ल कर दिया के होग्या? करकै कत्ल दिखाणा सीख।
खोजबीन कौण करै इब, पीळी कलम चलाणा सीख।

बड़ा नामवर बण ज्यागा, गीत राज के गाणा सीख।
सब बैंकां का धन तेरा, करजा ले पां ठाणा सीख।

ज्यादा मगज खपावै क्यूं, फरजी ठप्पा लाणा सीख।
गोर्की मुंशी कुछ कोनी, नाम बदल छपवाणा सीख।

आयोजक की कर तारीफ, आच्छी गोज भराणा सीख।
शाल इनाम सभी तेरे, बस ताड़ी बजवाणा सीख।
भेष बदल कै आणा सीख, हंगामा करवाणा सीख।

संपर्क—94165-13872

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