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कहानीJune 17, 2018

'लेकिन उसकी खोळ के टुकड़े-टुकड़े होगे। ओठै लोवै-धोरै ए नामी-गिरामी बैद रह्या करदा। कछुए की घरआळी नै वा बैद बुलाया। बैद नै एक एक करकै कछुए के खोळ के सारे टुकड़े कट्ठे करके आपस म्हं चेप दिये। यू ए कारण है के आज बी कच्छओं का खोळ खुरदरा है अर उसमें लकीर-ए-लकीर हैं।

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