स्मृति शेष मास्टर सतबीर द्वारा गाए सांग व किस्से भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, उधम सिंह, अंजना पवन, नल दमयन्ती, वीजा सोरठ, चापसिंह, जयमल फत्ता, पिंगला भरथरी, जानी चोर, शाही
स्मृति शेष मास्टर सतबीर द्वारा गाए सांग व किस्से भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, उधम सिंह, अंजना पवन, नल दमयन्ती, वीजा सोरठ, चापसिंह, जयमल फत्ता, पिंगला भरथरी, जानी चोर, शाही
रागनी मेरी भोळी सूरत कांब गई, मैं छोड़ रै आपणी धीर गया जलियांवाळे बाग का मंजर, मेरा काळजा चीर गया दन-दनादन गोळी चाली, दुश्मन के औजारां तै नर अर नारी
रागनी धांय धांय धांय होई उड़ै दनादन गोली चाली थी। कांपग्या क्रैक्सटन हाल सब दरवाजे खिड़की हाली थी।। पहली दो गोली दागी उस डायर की छाती के म्हां मंच तै
करनाल जिले केसिधपुर गांव में साधारण दुकानदार के घर 9 मई 1951 को जन्म। थानेसर से जे.बी.टी. की। हरियाणा शिक्षा विभाग में शिक्षक रहे। साक्षारता अभियान में सक्रिय भागीदारी। सेवानिवृति के बाद साहित्यिक कार्य में व्यस्त। च्यौंद कसूती (रागनी संग्रह), डंगवारा (रागनी संग्रह), दंगे पागल होते हैं (कविता संग्रह), त्रिवेणी(दोहे, कुण्डलियां, हरियाणवी गजल) रचनाएं प्रकाशित।
जिला जीन्द के खटकड़ गांव में 10 अप्रैल, 1958 में जन्म। प्रभाकर की शिक्षा प्राप्त की। कहानी, गीत, कविता, कुण्डलियां तथा दोहे लेखन। समसामयिक ज्वलंत विषयों पर दो सौ से अधिक रागनियों की रचना। रागनी-संग्रह शीघ्र प्रकाश्य। वर्तमान में महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक में कार्यरत।
फ़ेसबुक पै फ्रेंड पांच सौ पड़ोसी तै मुलाकात नहीं तकनीक नई यो नया जमाना रही पहलड़ी बात नहीं
रागनियां रागनियां प्रिय, पाठको, हम आपके लिये लेकर आ रहे हैं, डा. सुभाष चंद्र द्वारा संपादित पुस्तक – हरियाणवी लोकधारा प्रतिनिधि रागनियां – चुन कर कुछ मशहूर रागनियां। इन