All posts tagged in गजल

3Articles

गजलJune 18, 2018

जो लिखते फिरते हैं एक-इक मकां पे नाम अपना उन्हें बता दो कि इक दिन हिसाब भी होगा रात का वक़्त है संभल के चलो ख़ुद से आगे ज़रा निकल के चलो गर बदल सकता है औरों की तरह चेहरा बदल ले वरऩा इस बहरूपियों के शहर से फ़ौरन निकल ले

आलेख ज्ञान प्रकाश विवेक देश का विभाजन एक न भूलने वाली घटना थी। यह एक ऐसी त्रासदी थी, जिसने भूगोल ही नहीं, अवाम को भी तकसीम करके रख दिया। जो

ओम प्रकाश ग्रेवाल व दिनेश दधीचि आबिद आलमी के ग़ज़ल-संग्रह ‘नये ज़ाविए’ का मुख्य स्वर सीधी टकराहट का, जोखिम उठाने का है। आबिद आलमी के लिए सृजनात्मकता की यह एक

Search
Loading

Signing-in 3 seconds...

Signing-up 3 seconds...

RETURNING FOR ANOTHER TRIP?