रागनी मेरी भोळी सूरत कांब गई, मैं छोड़ रै आपणी धीर गया जलियांवाळे बाग का मंजर, मेरा काळजा चीर गया दन-दनादन गोळी चाली, दुश्मन के औजारां तै नर अर नारी
रागनी मेरी भोळी सूरत कांब गई, मैं छोड़ रै आपणी धीर गया जलियांवाळे बाग का मंजर, मेरा काळजा चीर गया दन-दनादन गोळी चाली, दुश्मन के औजारां तै नर अर नारी
रागनी ऊधम सिंह नै सोच समझ कै करी लन्दन की जाने की तैयारी।। राम मुहम्मद नाम धरया और पास पोर्ट लिया सरकारी।। किस तरियां जालिम डायर थ्यावै चिन्ता थी दिन
रागनी धांय धांय धांय होई उड़ै दनादन गोली चाली थी। कांपग्या क्रैक्सटन हाल सब दरवाजे खिड़की हाली थी।। पहली दो गोली दागी उस डायर की छाती के म्हां मंच तै