कबीर – क्यों भूलीगी थारो देस क्यों भूलीगी थारो देस

साखी -ऐसी मति संसार की, ज्यों गाडर1 का ठाठ2। एक पड़ा जेहि गाड़3 में, सबै जाहि तेहि बाट।।टेक -क्यों भूलीगी थारो देस दीवानी क्यों भूलीगी थारो देस हो-चरण -भूली मालन4 पाती रे तोड़े, पाती पाती में जीव हे रहे। पाती तोड़ देवत को चढ़ाई, वो देवत नरजीव5 बावरी।। डाली ब्रह्मा पाती बिसनु, फूल शंकर देव […]
कबीर – मौको कहां ढूंढे रे बन्दे

साखी – दौड़त-दौड़त दौड़िया, जहां तक मन की दौड़ दौड़ थका मन थिर2 हुआ, तो वस्तु ठौर की ठौर।।टेक – मौको कहां ढूंढे रे बन्दे, मैं तो तेरे पास। चरण – ना मैं देवल3 न मैं मस्जिद, ना काबे कैलास में। ना तो कौनों क्रिया-करम में, नहीं जोग-बैराग में।। ना मैं छगरी4 ना मैं भेड़ी, […]