All posts tagged in sujat husain

2Articles

साखी -ऐसी मति संसार की, ज्यों गाडर1 का ठाठ2। एक पड़ा जेहि गाड़3 में, सबै जाहि तेहि बाट।।टेक -क्यों भूलीगी थारो देस दीवानी क्यों भूलीगी थारो देस हो-चरण -भूली मालन4

साखी – दौड़त-दौड़त दौड़िया, जहां तक मन की दौड़ दौड़ थका मन थिर2 हुआ, तो वस्तु ठौर की ठौर।।टेक – मौको कहां ढूंढे रे बन्दे, मैं तो तेरे पास। चरण

Search
Loading

Signing-in 3 seconds...

Signing-up 3 seconds...

RETURNING FOR ANOTHER TRIP?