कबीर – क्यों भूलीगी थारो देस क्यों भूलीगी थारो देस

साखी -ऐसी मति संसार की, ज्यों गाडर1 का ठाठ2। एक पड़ा जेहि गाड़3 में, सबै जाहि तेहि बाट।।टेक -क्यों भूलीगी थारो देस दीवानी क्यों भूलीगी थारो देस हो-चरण -भूली मालन4 पाती रे तोड़े, पाती पाती में जीव हे रहे। पाती तोड़ देवत को चढ़ाई, वो देवत नरजीव5 बावरी।। डाली ब्रह्मा पाती बिसनु, फूल शंकर देव […]