सामाजिक न्याय अपने निर्माण के पचास वर्षों के दौरान हरियाणा राज्य का तीव्र आर्थिक विकास हुआ है। विकास के माप हेतु निर्मित सूचकांक के विभिन्न सूचकों को इस राज्य के
सामाजिक न्याय अपने निर्माण के पचास वर्षों के दौरान हरियाणा राज्य का तीव्र आर्थिक विकास हुआ है। विकास के माप हेतु निर्मित सूचकांक के विभिन्न सूचकों को इस राज्य के
कविता मैंने तुम्हें कहा था न मत कर कबीर-कबीर और अब शहर के बाहर खड़ा रह अकेला। अपने फुंके घर का देख तमाशा हक सच की आवाज लगाता पंजाबी से
ओम प्रकाश ग्रेवाल व दिनेश दधीचि आबिद आलमी के ग़ज़ल-संग्रह ‘नये ज़ाविए’ का मुख्य स्वर सीधी टकराहट का, जोखिम उठाने का है। आबिद आलमी के लिए सृजनात्मकता की यह एक
जिला जीन्द के खटकड़ गांव में 10 अप्रैल, 1958 में जन्म। प्रभाकर की शिक्षा प्राप्त की। कहानी, गीत, कविता, कुण्डलियां तथा दोहे लेखन। समसामयिक ज्वलंत विषयों पर दो सौ से अधिक रागनियों की रचना। रागनी-संग्रह शीघ्र प्रकाश्य। वर्तमान में महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक में कार्यरत।
धर्मेन्द्र कंवारी की हरियाणवी कविता मोल की लुगाई रामफळ गेल या कै मुसीबत आई किल्ले तीन अर घरां चार भाई मां खाट म्ह पड़ी रोज सिसकै मन्नै बहू ल्यादौ, मन्नै आग्गा दिक्खै
हरियाणा प्रांत के खिलाड़ी दुनिया भर में भारतवर्ष का डंका बजा रहे हैं। नवम्बर 1966 को हरियाणा प्रदेश भारत के सत्रहवें राज्य के रूप में मानचित्र पर आया था। पहले से ही सामाजिक पर्वों, उत्सवों व मेलों के अवसरों पर ताकत आजमाने वाले खेलों जैसे कबड्डी, कुश्ती और रस्साकसी आदि खेलों के आयोजन की परम्परा रही है। विश्व स्तर की खेल स्पर्धाओं जैसे एशियाड़, राष्ट्रमंडल तथा ओलम्पिक की खेल प्रतियोगिताओं में भारत के द्वारा जीते गए कुल पदकों में अकेले हरियाणा प्रांत के खिलाड़ियों द्वारा लगभग 35 प्रतिशत पदकों को प्राप्त किया है, जिसमें ताकत के खेल माने जाने वाले कुश्ती, कबड्डी और मुक्केबाजी में सर्वाधिक पदक अर्जित किए हैं।
खेती का घाटे का सौदा बनना, नीतियों का मामला है। यह खेती के कारपोरेटीकरण का मामला है। यह एक अंतर्राष्ट्रीय मसला है। इसके मायने हैं, फसल के बीजों, भावों, सबसिडी व तकनीकों का फैसला अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर डब्ल्यूटीओ आदि में होना। भारत में अभी भी आधी आबादी सीधे तौर पर खेती-किसानी से जुड़ी है। यहां उपरोक्त माडल के लागू होने का मतलब होगा 60 करोड़ लोगों का बेरोजगार हो जाना। इतनी बड़ी संख्या को कहां खपाया जाएगा, जबकि दूसरे सभी क्षेत्रों में रोजगार लगातार सिकुड़ता जा रहा है। हरियाणा उपरोक्त माडल के लागू होने की अग्रणी प्रयोगशाला है। भारी संख्या में किसानों को बड़ी रकम के क्रेडिट कार्ड देकर वापस यही पैसा मालों के उपयेाग में लगवा लेने की सरकारी योजना इसी साजिश का हिस्सा है। यह एक तरह से बड़े पैमाने पर खेती की जमीनों का जबरन हस्तांतरण साबित होगा।
भारत सरकार के कृषि विभाग द्वारा अभी हाल में जारी रिपोर्ट के अनुसार देश भर के विभिन्न हिस्सों में फल, सब्जियों, अण्डों और दूध में कीट नाशकों की उपस्थिति पर किए गए अध्ययन से स्पष्ट हुआ है कि इन सभी में इनकी न्यूनतम स्वीकृत मात्रा से काफी अधिक मात्रा पाई गई है। इस रिपोर्ट के अनुसार सत्र 2008 और 2009 के बीच देश के विभिन्न हिस्सों से एकत्र किए गए खाद्यान्न के नमूनों का अध्ययन देश की 20 प्रतिष्ठित प्रयोगशालाओं में किया गया तथा अधिकांश नमूनों में डी.डी.टी.,लिण्डेन और मानोक्रोटोफास जैसे खतरनाक और प्रतिबंधित कीटनाशकों के अंश इनकी न्यूनतम स्वीकृत मात्रा से अधिक मात्रा में पाए गए हैं। इलाहाबाद से लिए गए टमाटर के नमूने में डी.डी.टी.की मात्रा न्यूनतम् से 108 गुनी अधिक पाई गई है, यहीं से लिए गए भुट्टे के नमूने में प्रतिबंधित कीटनाशक हेप्टाक्लोर की मात्रा न्यूनतम स्वीकृत मात्रा से 10 गुनी अधिक पाई गई है, उल्लेखनीय है कि हेप्टाक्लोर लीवर और तंत्रिका तंत्र को नष्ट करता है।
बागी लड़कियां मैं जानती हूं बहुत सारी बागी लड़कियों की पहचान यहां तक कि उनके नाम व पते भी परन्तु आपको नहीं बताउंगी, वरना हो सकता है आप उन्हें ढूंढ निकाले अपने घर के उस अन्दर वाले कमरे में जिसकी कोई खिड़की बाहर नहीं खुलती।
फ़ेसबुक पै फ्रेंड पांच सौ पड़ोसी तै मुलाकात नहीं तकनीक नई यो नया जमाना रही पहलड़ी बात नहीं
पं. मांगे राम की धमाकेदार रागनी सारी उम्र गयी टोट्टे म्हं ना खाया टूट गुजारे तै कोणसा खोट बण्या साजन गई रूस लक्ष्मी म्हारे तै देखिये-सुनिए-पढ़िए desharyana.in
रागनियां रागनियां प्रिय, पाठको, हम आपके लिये लेकर आ रहे हैं, डा. सुभाष चंद्र द्वारा संपादित पुस्तक – हरियाणवी लोकधारा प्रतिनिधि रागनियां – चुन कर कुछ मशहूर रागनियां। इन
हरियाणा सृजन उत्सव में 24 फरवरी 2018 को ‘थिएटर ऑफ रेलेवंस’ के जनक मंजुल भारद्वाज से रंगकर्मी दुष्यंत के बीच परिचर्चा हुई और मौजूद श्रोताओं ने इसमें शिरकत की। प्रस्तुत है इस संवाद की रिपोर्ट। सं.
हरियाणा सृजन उत्सव में 24 फरवरी 2018 को ‘हरियाणा के दर्शकों की अभिरूचियाँ’ विषय पर परिचर्चा हुई जिसमें फ़िल्म अभिनेता व रंगकर्मी यशपाल शर्मा, सीनियर आईएएस वीएस कुंडू, और गौरव आश्री ने अपने विचार प्रस्तुत किए। इस परिचर्चा का संचालन किया संस्कृतिकर्मी प्रो. रमणीक मोहन ने। प्रस्तुत हैं परिचर्चा के मुख्य अंश - सं.