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कविताJune 21, 2018

बाल कविता चिड़िया मेरे घर की छत पर रोज फुदकती है रुक-रुक अपनी भाषा में जाने क्या बोला करती है टुक-टुक। उसकी बोली को सुन-सुनकर नन्हें चूजे आ जाते आंगन

हरियाणा सृजन उत्सव में  24 फरवरी 2018 को ‘थिएटर ऑफ रेलेवंस’  के जनक मंजुल भारद्वाज से रंगकर्मी दुष्यंत के बीच परिचर्चा हुई और मौजूद श्रोताओं ने इसमें  शिरकत की। प्रस्तुत है इस संवाद की रिपोर्ट। सं.

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