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समय के साथ-साथ परिस्थितियां बदली और ‘बांगरू’ भाषा के लोक नाटक (सांग), रागनी, कथाएं, गाथाएं, किस्से, कहानियां, लोक गीत, फिल्में, हास्य-व्यंग्य इतने प्रचारित-प्रसारित हुए कि एक सीमित क्षेत्र की भाषा ही हरियाणवी मानी जाने लगी। हरियाणा के प्रतिष्ठित भाषाविद् डा. बलदेव सिंह का मत है कि ‘‘यहां जिस हरियाणी की बात की जा रही है, वह सारे हरियाणा की बोली नहीं है, अपितु रोहतक और सोनीपत की बांगरू है। इसके अतिरिक्त हरियाणा के में ब्रज, मेवाती, अहीरवाटी, बागड़ी, कुरुक्षेत्र-करनाल की कौरवी आदि कई बोलियां हैं।’’

रागनियां रागनियां        प्रिय, पाठको, हम आपके लिये लेकर आ रहे हैं, डा. सुभाष चंद्र द्वारा संपादित पुस्तक – हरियाणवी लोकधारा प्रतिनिधि रागनियां – चुन कर कुछ मशहूर रागनियां। इन

हरियाणा सृजन उत्सव में  24 फरवरी 2018 को ‘थिएटर ऑफ रेलेवंस’  के जनक मंजुल भारद्वाज से रंगकर्मी दुष्यंत के बीच परिचर्चा हुई और मौजूद श्रोताओं ने इसमें  शिरकत की। प्रस्तुत है इस संवाद की रिपोर्ट। सं.

हरियाणा सृजन उत्सव में  24 फरवरी 2018 को ‘हरियाणा के दर्शकों की अभिरूचियाँ’ विषय पर परिचर्चा हुई जिसमें फ़िल्म अभिनेता व रंगकर्मी यशपाल शर्मा, सीनियर आईएएस वीएस कुंडू, और गौरव आश्री ने अपने विचार प्रस्तुत किए। इस परिचर्चा का संचालन  किया संस्कृतिकर्मी प्रो. रमणीक मोहन ने। प्रस्तुत हैं परिचर्चा के मुख्य अंश - सं.

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