लेख दीपंचद्र निर्मोही आरक्षण की अवधारणा का जन्म जातियोंं के जन्म से ही जुड़ा लगता है। जाति-प्रथा के अंकुर वैदिक-काल में ही फूटते देखे जा सकते हैं। ऋग्वेद के पुरुष
लेख दीपंचद्र निर्मोही आरक्षण की अवधारणा का जन्म जातियोंं के जन्म से ही जुड़ा लगता है। जाति-प्रथा के अंकुर वैदिक-काल में ही फूटते देखे जा सकते हैं। ऋग्वेद के पुरुष