कविता एक चुप्पी एक चुप्पी हवा को बहने नहीं देगी आज कोलाहल कोई छूट गया पीछे सांसों का चलना तो दूर धड़कन का संपन्दन तक जैसे विराम हो गया हो
कविता एक चुप्पी एक चुप्पी हवा को बहने नहीं देगी आज कोलाहल कोई छूट गया पीछे सांसों का चलना तो दूर धड़कन का संपन्दन तक जैसे विराम हो गया हो