मेवाती लोक गीत – हुकम करो तो मईयां आऊं तेेरे र भवन में

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मेवाती लोक गीत


हुकम करो तो मईयां आऊं तेेरे र भवन में।
गइया को दूध हमारे बछड़ा ने बिगाड़ो।
कांई की धार चढ़ाऊ, मईया तेरे र भवन में।
कुआं को जल, तेरी मछली ने बिगाड़ो।
कांई सू तोय नहवाऊं, मइया तेरे र भवन में।
पीळे-पीळे लड्डू हमारे हलवाई ने बिगाड़े
कांई को भोग लगाऊं मइया तेरे र भवन में।
पीळे-पीळे सोने, हमारे सुनरा ने बिगाड़े,
कांइ की छतर चढ़ाऊं, मइया तेरे र भवन में।
हुकम करो तो मईया जाऊं तेरे र भवन में।।

संकलन- माजिद मेवाती

स्रोतः सं. सुभाष चंद्र, देस हरियाणा (नवम्बर 2016 से फरवरी 2017, अंक-8-9), पेज- 113

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