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हरियाणवी लोकगीत

मेवाती लोक गीत -मां मेरा पीसणों, कितनो पीसो री

मेवाती लोक गीत मां मेरा पीसणों, कितनो पीसो री। जितनी दगड़ा में रेत, जणी सू कहियो री। इतनो गूंदो री, जितनी पोखर में कीच। जणी सू कहियो री... मां...

मेवाती लोक गीत – हुकम करो तो मईयां आऊं तेेरे र भवन में

मेवाती लोक गीत हुकम करो तो मईयां आऊं तेेरे र भवन में। गइया को दूध हमारे बछड़ा ने बिगाड़ो। कांई की धार चढ़ाऊ, मईया तेरे र भवन...

मेवाती लोक गीत – मैं तो चिड़िया-सी उड़ जाऊंगी मेरा बाबल

मेवाती लोक गीत मैं तो चिड़िया-सी उड़ जाऊंगी मेरा बाबल। मैं तो तीन दिना भारी मेरा बाबल। मोसू हड़क-बड़क मत बोले मेरा बाबल मैं तो चिड़िया सी उड़...

आंगण बीच कूई राजा (लोकगीत)

आंगण बीच कूई राजा डूब क: मरूंगी तू मत डरिए मैं तो औरां न: डराऊंगी जेठ लड़ैगा पाछा फेर क: लडूंगी आजा री जिठानी तेरे धान से...

1857, किस्सा सदरूद्दीन मेवाती का – सहीराम

नौटंकी पात्र : नट तथा नटी। दो देहाती (बार-बार उन्हीं को दोहराया जा सकता है),एक ढिढ़ोरची (दो देहातियों में एक हो सकता है या नट...

सुधीर शर्मा – मेरा नौकर वर ढुंढवाइए मेरी मां

हरियाणवी नृत्य गीत मेरा नौकर वर ढुंढवाइए मेरी मां विवाह योग्य होने पर परम्परागत समाज में अपना पति पसंद करने वाली युवतियों की भूमिका नहीं होती।...