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तब इरफान बोले थे – तनहाई से घबराता हूं और पैसों से ऊब जाता हूं

Post Views: 20 बॉलिवुड के बेहतरीन ऐक्टर इरफान भले ही इस दुनिया से चले गए हों मगर फैन्स के दिलों में वह हमेशा जिंदा रहेंगे। इरफान को गुजरे पूरा एक…

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अविस्मरणीय विभूति : सत्यजित राय-धीरेंद्र कुमार राय

राय के साँसों की रफ्तार धीमी हो चुकी थी। पैर थम से गए थे। शरीर पूरी तरह थक चुका था। उनकी आँखें अब पूरी पलक फैलाकर दुनिया को देखने में असमर्थ थीं लेकिन उनकी सोच अभी भी समाज की नब्ज को मजबूती से थामें हुई थी। हौसले बुलंद थे। शारीरिक अस्वस्थता के बावजूद खुद के प्रति उनका विश्वास कुछ ज्यादा ही था। जीवन के अंतिम क्षणों में वे फिल्म ‘आगंतुक’ के माध्यम से समाज के साथ कदमताल करते हुए सभ्यता विमर्श कर रहे थे। (लेख से)

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Post Views: 25 प्रश्न-“आपके यहाँ इतनी अधिक भाषाएँ, इतनी अधिक जातियाँ हैं कि उनका पूरा गड़बड़झाला है। आप एक-दूसरे को किस तरह से समझ पाते हैं?”  अबूतालिब का जवाब-“जो भाषाएँ…

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जीवन के विविध रंगों जीवन-दृष्टि देता रंगमंच – अरुण कुमार कैहरबा

थियेटर या रंगमंच जीवन के विविध रंगों को मंच पर प्रस्तुत करने की जीवंत विधा है। रंगमंच सही गलत के भेद को बारीकी से चित्रित करता है। रंगमंच सवाल खड़े करता है। रंगमंच समाज का आईना ही नहीं है, बल्कि परिवर्तन का सशक्त औजार भी है।

सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने की मुहिम – अरुण कुमार कैहरबा

देस हरियाणा और सत्यशोधक फाउंडेशन के तत्वावधान में प्रदेश के लेखकों-कवियों ने 29फरवरी व 1मार्च को हरियाणा सृजन यात्रा निकाली। सृजन यात्रा में हरियाणा की सांस्कृतिक धरोहर से जुडऩे की कोशिश के रूप में चार महान साहित्यकारों- शायर अल्ताफ हुसैन हाली, बाबू बालमुकुंद गुप्त, संत कवि गरीबदास और सूफी कवि बाबा फरीद से जुड़े क्रमश: पानीपत, रेवाड़ी जिले के गांव गुडिय़ानी, झज्झर जिला के गांव छुड़ानी व हांसी में स्थित स्थानों का भ्रमण किया गया।

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मीडिया में हरियाणवी महिला की छवि – सहीराम

Post Views: 629 सहीराम  मीडिया में हरियाणवी महिला की छवि क्या है? जैसे हरियाणवी पुरुष जिसे आमतौर पर हाळी-पाळी कहा जाता है, की छवि खेतों में खटनेवाले एक मेहनतकश किसान…

अलीगढ़ : समलैंगिकता पर विमर्श -विकास साल्याण

Post Views: 499 समलैंगिकता को अलग-अलग दृष्टि से देखा जाता है कुछ समलैंगिकता को मानसिक बीमारी मानते हैं। कुछ इसे परिस्थितियों के कारण उत्पन्न आदत मानते हैं तो कुछ एक…

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कुछ मुंबइया फिल्में और हरियाणवी जनजीवन का यथार्थ – सहीराम

Post Views: 400 अभी तक यही माना जाता रहा है कि हरियाणवी जन जीवन खेती किसानी का बड़ा ही सादा और सरल सा जन जीवन है। इसमें न कोई छल-कपट…

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कहानी का रंगमंच -पंकज कुमार

Post Views: 420 आधुनिक काल में रंगमंच शब्द का प्रयोग व्यापक धरातल पर किया जाता है जिसमें रंगमंच के स्थूल तत्व, मंच, दृश्य-सज्जा, प्रकाश-व्यवस्थाओं, ध्वनि-संगीत योजना, नेपथ्य इत्यादि तो आते…