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सौंदर्य बोध और शिवत्व बोध – अज्ञेय

अज्ञेय हिंदी साहित्य में एक कवि, लेखक तथा निबन्धकार के रूप में जाने जाते हैं. अज्ञेय अपनी रचनाओं में व्यक्तिस्वतंत्रता के पक्षधर थे. उनका मानना था कि मनुष्य समाज में रहते हुए पूर्ण रूप से स्वतंत्र है. ‘सौंदर्य बोध और शिवत्व बोध’ नामक अपने इस निबन्ध में उन्होंने कला में सौदर्य तत्व तथा शिवत्व यानि मंगलकारी होने के भाव को भिन्न भिन्न माना है जबकि ‘संस्कृति और सौन्दर्य’ नामक अपने निबन्ध में नामवर सिंह शिवत्व- बोध सहित रचना को ही सुंदर कहते हैं. विद्यार्थियों के लिए यह शोध का विषय हो सकता है.

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संस्कृति और सौन्दर्य- नामवर सिंह

नामवर सिंह आधुनिक हिंदी आलोचना के आधार स्तम्भ माने जाते हैं. उन्होंने आलोचना के परम्परागत मानदंडों से हटकर एक नवीन दृष्टि से साहित्य को परखा है. संस्कृति और सौन्दर्य नामक अपने लेख में आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी को संदर्भित करते हुए भारतीय संस्कृति की सामासिकता को स्पष्ट करते हैं. इसके साथ साथ वह कला में सुंदर क्या है? इस पर भी विस्तृत विमर्श प्रस्तुत करते हैं.

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उत्तराफाल्गुनी के आसपास- कुबेरनाथ राय

कुबेरनाथ राय को ललित निबन्ध परम्परा में एक सशक्त निबन्धकार के रूप में ख्याति प्राप्त है. इस निबन्ध में कुबेरनाथ जी द्वारा मनुष्य की आयु को ऋतुओं तथा नक्षत्रों के समान ही बताकर, दैहिक यौवन के क्षीण होने पर भी मानसिक यौवन को निरंतर चिरंजीवी बनाए रखने की सम्भावनाओं पर विचार किया गया है. इस निबन्ध में सृजन के लिए पुरातन तथा नूतन दोनों विचारधाराओं को साथ लेकर चलने पर बल दिया गया है.

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मेरे राम का मुकुट भीग रहा है- विद्यानिवास मिश्र

‘मेरे राम का मुकुट भीग रहा है’ नामक निबन्ध में विद्यानिवास मिश्र ने वर्तमान समय तथा भारतीय लोक संकृति को सन्दर्भ में रखते हुए आधुनिक चिंताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है. इस निबन्ध में मुख्यतः मध्यवर्गीय पीढ़ियों में वैचारिक अंतर, मनुष्य जीवन की सार्थकता तथा स्त्री की दोहरी समस्याओं को विचार का विषय बनाया गया है.

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नाख़ून क्यों बढ़ते हैं- हजारी प्रसाद द्विवेदी

आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी को ललित निबन्धों का जनक माना जाता है. नाखून क्यों बढ़ते हैं निबन्ध में आचार्य द्विवेदी मनुष्य की पाशविक प्रवृति जैसी दुर्बलताओं की ओर संकेत करते हुए मनुष्य की सृजन सम्बन्धी क्षमताओं को भी सामने लाने का प्रयास करते हैं. इस निबन्ध में जहाँ एक ओर आचार्य द्विवेदी द्वारा पशुत्‍व का द्योतक भावों को लक्षित किया गया है वहीं दूसरी तरफ वे मनुष्य की करुणा तथा भाईचारे की भावना का भी दर्शन कराते हैं.

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कविता क्या है- रामचंद्र शुक्ल

कविता क्या है निबन्ध आचार्य शुक्ल के सबसे महत्वपूर्ण निबन्धों में से एक है. इसी निबन्ध के माध्यम से शुक्ल जी ने अपनी कविता सबंधी मान्यताओं को प्रस्तुत किया है. इस निबन्ध को पढकर यह अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है कि शुक्ल जी कविता में रसवाद तथा लोकमंगल की भावना के समर्थक थे.

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भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है- भारतेंदु हरिश्चंद्र

‘भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है’ नामक निबन्ध भारतेंदु द्वारा भारत देश के इतिहास, वर्तमान की समस्याओं तथा भविष्य की सम्भावनाओं को केंद्र में रखकर लिखा गया है. इस निबन्ध में भारतेंदु द्वारा परदेसी भाषा तथा परदेसी वस्तुओं के प्रति सतर्क रहकर स्वदेसी भाषा और वस्तुओं पर निर्भर रहकर उन्नति करने का संदेश दिया गया है.

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मजदूरी और प्रेम – सरदार पूर्ण सिंह

Post Views: 11 हल चलाने वाले का जीवन हल चलाने वाले और भेड़ चराने वाले प्रायः स्वभाव से ही साधु होते हैं। हल चलाने वाले अपने शरीर का हवन किया…

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देवदारु – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

Post Views: 16 निष्टजनानुमोदित ‘सज्जा’ को ‘छाया’ नाम दिया था वह जरूर इस पेड़ की शोभा से प्रभावित हुआ था। पेड़ क्या है, किसी सुलझे हुए कवि के चित्त का…