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किसानी चेतना की एक रागनी और एक ग़ज़ल- मनजीत भोला

मनजीत भोला का जन्म सन 1976 में रोहतक जिला के बलम्भा गाँव में एक साधारण परिवार में हुआ. इनके पिता जी का नाम श्री रामकुमार एवं माता जी का नाम श्रीमती जगपति देवी है. इनका बचपन से लेकर युवावस्था तक का सफर इनकी नानी जी श्रीमती अनारो देवी के साथ गाँव धामड़ में बीता. नानी जी की छत्रछाया में इनके व्यक्तित्व, इनकी सोच का निर्माण हुआ. इन्होने हरियाणवी बोली में रागनी लेखन से शुरुआत की मगर बाद में ग़ज़ल विधा की और मुड़ गए. इनकी ग़ज़लों में किसान, मजदूर, दलित, स्त्री या हाशिये पर खड़े हर वर्ग का चित्रण बड़ी संजीदगी के साथ चित्रित होता है. वर्तमान में कुरुक्षेत्र में स्वास्थ्य निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं.

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मनजीत भोला की ग़ज़लें

मनजीत भोला का जन्म सन 1976 में रोहतक जिला के बलम्भा गाँव में एक साधारण परिवार में हुआ. इनके पिता जी का नाम श्री रामकुमार एवं माता जी का नाम श्रीमती जगपति देवी है. इनका बचपन से लेकर युवावस्था तक का सफर इनकी नानी जी श्रीमती अनारो देवी के साथ गाँव धामड़ में बीता. नानी जी की छत्रछाया में इनके व्यक्तित्व, इनकी सोच का निर्माण हुआ. इन्होने हरियाणवी बोली में रागनी लेखन से शुरुआत की मगर बाद में ग़ज़ल विधा की और मुड़ गए. इनकी ग़ज़लों में किसान, मजदूर, दलित, स्त्री या हाशिये पर खड़े हर वर्ग का चित्रण बड़ी संजीदगी के साथ चित्रित होता है. वर्तमान में कुरुक्षेत्र में स्वास्थ्य निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं.

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दो हरियाणवी ग़ज़लें- कर्मचंद केसर

कर्मचंद केसर हरियाणा राज्य के कैथल जिले में रहते हैं। केसर की गज़लें पाठक का हरियाणवी समाज से सीधा संबंध स्थापित कराती हैं। प्रस्तुत है उनकी दो गज़लें:

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दस हरियाणवी गज़लें- मंगत राम शास्त्री

मंगत राम शास्त्री- जिला जींद के ढ़ाटरथ गांव में सन् 1963 में जन्म। शास्त्री (शिक्षा शास्त्री), हिंदी तथा संस्कृत में स्नातकोत्तर। साक्षरता अभियान में सक्रिय हिस्सेदारी तथा समाज-सुधार के कार्यों में रुचि। ज्ञान विज्ञान आंदोलन में सक्रिय भूमिका। “अध्यापक समाज” पत्रिका का संपादन। कहानी, व्यंग्य, गीत, रागनी एंव गजल विधा में निरंतर लेखन तथा पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन। “अपणी बोली अपणी बात” नामक हरियाणवी रागनी-संग्रह प्रकाशित।

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ज़माने में नया बदलाव लाने की ज़रूरत है -महावीर ‘दुखी’

Post Views: 567 ज़माने में नया बदलाव लाने की ज़रूरत है, अकीदों का सड़ा मलबा उठाने की ज़रूरत है। उजालों के तहफ्फुज में कभी कोई न रह जाए, अंधेरों को…

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गहराई तक जावण म्हं बखत तो लागै सै -रिसाल जांगड़ा

Post Views: 131 हरियाणवी ग़ज़ल रिसाल जांगड़ा   गहराई तक जावण म्हं बखत तो लागै सै। सच्चाई उप्पर ल्यावण म्हं बखत तो लागै से।   करैग जादां तावल जे उलझ…

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एक मधुर सपना था, आख़िर टूट गया

Post Views: 273 महेन्द्र प्रताप ‘चांद’ (वरिष्ठ शायर महेंद्र प्रताप चांद अंबाला में रहते हैं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में लंबे समय तक पुस्तकालय अध्यक्ष रहे। पचासों साल से अपनी लेखनी…

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सीली बाळ रात चान्दनी आए याद पिया -कर्मचंद केसर

Post Views: 177   कर्मचन्द ‘केसर’  ग़ज़ल सीळी बाळ रात चान्दनी आए याद पिया। चन्दा बिना चकौरी ज्यूँ मैं तड़फू सूँ पिया। तेरी याद की सूल चुभी नींद नहीं आई,…