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क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले कविता : दीपिका शर्मा

Post Views: 105 क्रान्तिज्योति नाम सावित्री,उसने मन में ठानी थी,तलवार कलम को बना करकेक्रांति सामाजिक लानी थी। शिक्षा का प्रचार करकेसबको नई राह दिखानी थी,सब के ताने सुन-सुन केप्रथम शिक्षिका

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काव्य-गोष्ठी का आयोजन

Post Views: 223 अरुण कैहरबा राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, इंद्री के प्रांगण में 28 अक्तूबर 2018 को सृजन मंच इन्द्री के तत्वावधान में देस हरियाणा काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया

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दो मांएं -मदन भारती

Post Views: 656 कविता ये लाशें जो जमीन पर अस्त व्यस्त पडी हैं कुछ क्षण पहले ये हंस खेल रहे थे मारने से पहले इन्हें, घर से बुलाया गया था

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तेरा मेरा मनुवा – कबीर

Post Views: 678 साखी – सात दीप नौ खण्ड में, सतगुरु फेंकी डोर। हंसा डोरी न चढ़े, तो क्या सतगुुरु का जोर।। टेक तेरा मेरा मनुवा कैसे एक होई रे।

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कहा था न -हर भजन सिंह रेणु

Post Views: 775 कविता मैंने तुम्हें कहा था न मत कर कबीर-कबीर और अब शहर के बाहर खड़ा रह अकेला। अपने फुंके घर का देख तमाशा हक सच की आवाज

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सांझा लंगर -हरभजन सिंंह रेणु

Post Views: 579 कविता   आओ मेरे लाल मेरी आंखों के तारो! मैं अब तुम्हारी भूख तुम्हारी रुलाई सहन नहीं कर सकती लो यह रस्सी गर्दन में डालकर झूल जाओ

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गैस गुबारा – बी. मदन मोहन

Post Views: 583 बाल कविता मैं हूं गैस गुबारा भैया ऊंची मेरी उड़ान नदियां-नाले-पर्वत घूमूं फिर भी नहीं थकान बस्ती-जंगल बाग-बगीचे या हो खेत-खलिहान रुकता नहीं कहीं भी पलभर देखूं

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अन्त मंथन – सुशीला बहबलपुर 

Post Views: 636 अन्त मंथन ये आबो हवा बेचैन सी लगती है मुझे आज रूह हर शख्स की इस शहर में बेदम सी लगती है मुझे आज लगता है खो

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उत्सव हरियाणा सृजन – सिद्दीक अहमद मेव

Post Views: 678 कविता एक साथ इतने हैं रंग, देख के मैं तो रह गया दंग,, कोई गा रहा दफ पर यहां, कोई बजा रहा है मृदंग, उत्सव हरियाणा सृजन।

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ब्रजेश कृष्ण की कविताएं

सबुकछ जानती है पृथ्वी…
ये कैसी डरावनी परछाइयाँ
कि छिप रहे हैं हम
अपनी ही चालाक हँसी के पीछे
तहस-नहस हो रहे हैं घोंसले
डूब रही है पक्षियों की आवाज
मर रहा है हवा का संगीत … Continue readingब्रजेश कृष्ण की कविताएं