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कहां से आया कहां जाओगे -कबीर

Post Views: 826 साखी – अलख1 इलाही2 एक है, नाम धराया दोय। कहे कबीर दो नाम सुनी, भरम3 पड़ो मति कोय।।टेक कहां से आया कहां जाओगे, खबर करो अपने तन

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पंडित तुम कैसे उत्तम कहाये -कबीर

Post Views: 633 साखी – पंडित और मशालची1, दोनों को सूझे नाहि। औरन को करे चांदनी, आप अंधेरा मांई।।टेक पंडित तुम कैसे उत्तम कहाये। चरण – एक जाइनि2 से चार

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अमल करे सो पाई – कबीर

Post Views: 943 साखी – कहंता1 तो बहुत मिला, गहंता2 मिला न कोय। सो कहंता बहि जान दे, जो न गहंता होय।।टेक अमल करे सो पाई रे साधो भाई अमल

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म्हारो हीरो हेराणो कचरा में – कबीर

Post Views: 563 साखी – पूरब दिशा हरी को बासा, पश्चिम अल्लह मुकामा। दिल में खोजि दिलहि मा खोजे, इहै करीमा रामा।।टेक – म्हारो हीरो हेराणो कचरा में, पांच पचीस

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नाम से मिल्या ना कोई -कबीर

Post Views: 586 साखी – हंसो का एक देश है, जात नहीं वहां कोय। कागा करतब ना तज1 सके, तो हंस कहां से होय।।टेक नाम से मिल्या न कोई रे

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पंडित छाण पियो जल पाणी -कबीर

Post Views: 664 साखी – बैस्नों भया तो क्या भया, बूझा नहीं विवेक। छापा तिलक बनाई करि, दुविधा लोक अनेक।। टेक – पंडित छाण पियो जल पाणी, तेरी काया कहां

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तन काया का मन्दिर – कबीर

Post Views: 729 साखी – मन मंदिर दिल द्वारखा, काया काशी जान। दस द्वारे का पिंजरा, याहि2 में ज्योत पहचान।। टेक तन काया का मंदिर साधु भाई, काया राम का

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पंडित की धेनु दूध नहीं देती – कबीर

Post Views: 607 साखी – पाथर पूजत हरि मिले, तो मैं पूजु पहाड़। वा से तो चाकी भली, पीस खाये संसार।।टेक धातु की धेनु दूध नही देती रे बीरा म्हारा,

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जोगी मन नी रंगाया – कबीर

Post Views: 718 साखी – सिद्ध भया तो क्या भया, चहु दिस1 फूटी बास2। अंदर वाके  बीज है, फिर उगन की आस3। टेक जोगी मन नी रंगाया, रंगाया कपड़ा। पाणी में

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कोई सफा न देखा दिल का – कबीर

Post Views: 743 संगत  साधु की, नित2 प्रीत कजे जाय। दुर्मति दूर बहावसि3, देखी सूरत जगाय।।टेक – कोई सफा न देखा दिल काचरण – बिल्ली देखी बगला देखा, सर्प जो

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