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‘लोकां दियां होलियां, खालसे दा होला ए’ – पंजाब में होली नहीं मनाया जाता है होल्ला-मोहल्ला

‘लोकां दियां होलियां, खालसे दा होला ए’ –

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8 मार्च – अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास

– सोनी सिंह 8 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस दुनिया भर में हर साल मनाया जाता है। यह महिलाओं की आर्थिक, राजनीतिक और सामजिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। यह कोई सामान्य दिवस नहीं है बल्कि इस के लिए सैकड़ों महिलाओं, मजदूरों ने अपनी जान कुर्बान की है और संघर्ष किया है। आज इसको केवल महिला

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 गहरे सामाजिक सरोकारों से जुड़े थे प्रोफेसर सूरजभान

नरेश कुमार जाने-माने इतिहासकार, पुरातत्ववेता और समाज सुधारक प्रोफेसर सूरजभान 14 जुलाई 2010 को हमारे बीच से चले गए। प्रोफेसर सूरजभान का जन्म 1 मार्च 1931 को मिंटगुमरी (एकीकृत पंजाब)जिला के देहात 51 चक में हुआ। उनके पिताजी सेना में नौकरी करते थे।         प्रोफेसर सूरजभान ने अपनी प्राईमरी परीक्षा अरफ ( मिंटगुमरी) से पास की, मैट्रिक तक की शिक्षा

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आजादी से पहले का हरियाणा

रघुवीर सिंह हरियाणा हिन्दुस्तान के उन प्रदेशों में से है,जो राजनीतिक तथा सामाजिक तौर पर काफी पिछड़े हुए इलाके हैं और जिनमें राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन तथा दूसरे समाज-सुधार आंदोलनों का प्रभाव भी ज्यादा नहीं रहा। शिक्षा का प्रसार भी बहुत कम रहा और कारखाने न के बराबर ही लगे।          सारे ही प्रांत में खेती काफी पिछड़ी

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ऊधम सिंह तेरे नाम का

 मनोज पवार ‘मौजी’ भारत तै चल लंदन पोहंच्या, दिल भर रया इंतकाम का दुनिया के म्हं रुक्का पाट्या, ऊधम सिंह तेरे नाम का जलियांवाळे बाग की घटना, पूरी दिल पै ला ली रै खून का बदला खून तै लेऊं, या ए कसम उठा ली रै उस डायर नै छोडूं ना, जो मुजरिम कत्लेआम का दुनिया के म्हं रूक्का पाट्या ….

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हरियाणा में सभ्यता का उदय

          मध्य कांस्य-काल में जो, पच्चीस सौ ई.पू. से सत्रह सौ ई.पू. के बीच रखा जाता है, हरियाणा में भी अन्य पड़ोसी प्रदेशों की भाँति सभ्यता का उदय है। इस काल की अनेक बस्तियाँ हिसार, जींद, कुरुक्षेत्र, रोहतक तथा भिवानी जिलों में खोज निकाली गई हैं। इनमें मित्ताथल, राखीगढ़ी, बानावली और बालू इनके प्रमुख केंद्र थे। राखीगढ़ी, में आज भी एक विशाल टीले के अवशेष विद्यमान हैं। बानावली, बालू और सम्भवतः मित्ताथल और राखीगढ़ी में किले और बस्तियों का विन्यास सिन्धु-सभ्यता के नगर-विन्यास से मेल खाता है। इनके मकान कच्ची एवं पक्की ईंटों के बने थे। सड़कें एवं गलियाँ बस्ती के आर-पार विद्यमान थीं। घरों में चौक, स्नानघर, रसोई आदि की सुविधाएँ विद्यमान थीं।

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