Tag Archives: haryana

उत्पीड़न घटना नहीं, बल्कि एक विचारधारा है

विकास साल्याण सत्यशोधक फाऊंडेशन और डा.ओमप्रकाश ग्रेवाल अध्ययन संस्थान, कुरुक्षेत्र की ओर से डा. भीम राव अंबेडकर और जोतिबा–फुले के जयंती के उपलक्ष में एक विचार–गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसका विषय – मौजूदा दौर में दलित उत्पीड़न के आयाम। इसमें मुख्य वक्ता के तौर पर प्रख्यात दलित चिंतक और जन मीड़िया के संपादक अनिल चमड़िया थे। उन्होंने बाबा साहेब

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हरियाणा का इतिहास-राजकीय वैभव के पथ पर

बुद्ध प्रकाश  गुप्त युग में शांतिकाल के दौरान हरियाणा का भौतिक एवं आर्थिक विकास हुआ। यहां के लोग देश के अन्य भागों में फैल गए, जहां वे अपने क्षेत्र का नाम ले गए। गुजरात में बसे लोगों ने मैत्रक सम्राट ध्रुवसेन प्रथम (519-549 ईसवी) के गनेसगद मुद्रणपट्टों में वर्णित बस्ती का नाम हरियाणा रखा, अन्य लोग मत्तमयूर का नाम मध्यप्रदेश

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यह मतदाताओं को रिश्वत तो नहीं ? – #Desharyana_Counter_Fake_News

#Desharyana_Counter_Fake_News #देसहरियाणा-काउंटर-फेकन्यूज भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आदर्श आचार सहिंता के अनुसार किसी मतदाता को मतदान करने के पक्ष में रिश्वत देना, डराना, धमकाना, मदतान केंद्र तक ले जाने के लिए वाहन आदि का प्रयोग करना अपराध है। पहली बार मतदान करने वाले युवकों को रिझाने के हथकंडे क्या यह मतदाताओं को रिश्वत तो नहीं ? लोकतंत्र का महापर्व कहे

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 गहरे सामाजिक सरोकारों से जुड़े थे प्रोफेसर सूरजभान

नरेश कुमार जाने-माने इतिहासकार, पुरातत्ववेता और समाज सुधारक प्रोफेसर सूरजभान 14 जुलाई 2010 को हमारे बीच से चले गए। प्रोफेसर सूरजभान का जन्म 1 मार्च 1931 को मिंटगुमरी (एकीकृत पंजाब)जिला के देहात 51 चक में हुआ। उनके पिताजी सेना में नौकरी करते थे।         प्रोफेसर सूरजभान ने अपनी प्राईमरी परीक्षा अरफ ( मिंटगुमरी) से पास की, मैट्रिक तक की शिक्षा

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हरियाणा के पचास साल:भविष्य के सवाल

डा. विजय विद्यार्थी एक नवम्बर 2016 को हरियाणा ने 50 साल का सफर पूरा किया। इस अवसर को सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं ने पूरे प्रदेश में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया प्रदेश की साहित्यिक-सांस्कृतिक अभिव्यक्ति की प्रत्रिका ‘देस हरियाणा’ का 8वां-9वां संयुक्तांक ‘हरियाणा के 50 साल क्या खोया क्या पाया’ विशेषांक के तौर पर हरियाणा को समर्पित रहा। जिसके

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आजादी से पहले का हरियाणा

रघुवीर सिंह हरियाणा हिन्दुस्तान के उन प्रदेशों में से है,जो राजनीतिक तथा सामाजिक तौर पर काफी पिछड़े हुए इलाके हैं और जिनमें राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन तथा दूसरे समाज-सुधार आंदोलनों का प्रभाव भी ज्यादा नहीं रहा। शिक्षा का प्रसार भी बहुत कम रहा और कारखाने न के बराबर ही लगे।          सारे ही प्रांत में खेती काफी पिछड़ी

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डा. अर्जुन सिंह – हरियाणा कृषि परिदृश्य : समस्याएं एवं सुझाव

खेती-बाड़ी भारतीय गणतन्त्र में, एक अलग राज्य के रूप में हरियाणा 1 नवम्बर 1966 को अस्तित्व में आया जो पंजाब प्रांत का भाग हुआ करता था। चाहे हरियाणा क्षेत्र समेत पूरे पंजाब को पंजाब प्रांत ही माना जाता था फिर भी हरियाणा क्षेत्र एवं इस धरती की सदियों से अलग पहचान थी। यह राज्य आरम्भ से ही भारतीय संस्कृति और

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भारत में मजहब

सर छोटू राम – अनुवाद हरि सिंह भारतीय समाज में मजहब की भूमिका जानने की बटलर की जिज्ञासा पर छोटू राम ने समाजविज्ञानी की अन्तर्दृष्टि से बहुआयामी जवाब दिया।                 पूरब में, विशेषतः भारत में लोगों में मजहब का बहुत गहरा और ऊंचा स्थान है। यह लिखने में मुझे तनिक भी झिझक नहीं कि भारत में भी मजहब के बारे

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रेनू यादव – भारत में उच्च शिक्षा और युवा वर्ग

शिक्षा आज भारत का उच्च शिक्षा का ढांचा पूरे विश्व में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर है। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार उच्च शिक्षण संस्थानों और उनमें पढऩे वाले बच्चों एवं शिक्षकों में लगातार वृद्धि हो रही है। भारत में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात लगभग 20.4 प्रतिशत है, वही हरियाणा का ग्रॉस एनरोलमेंट अनुपात अगर देखा

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डा. सुभाष चंद्र – हरियाणा में  दलित दशा, उत्पीड़न व प्रतिरोध

सामाजिक न्याय पिछले कुछ वर्षों में हरियाणा में दलित उत्पीड़न के जघन्य कांड हुए हैं जिस कारण हरियाणा का समाज राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहा है। हरियाणा का समाज तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। दलित उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ रही हैं तो दलित वर्ग की ओर से तीखा प्रतिरोध भी हो रहा है।

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